अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga day) special – क्यों करना चाहिए योग?

आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) है। पूरे संसार में आज सभी लोग योग दिवस मना रहे हैं । मनुष्य जीवन का उच्चतम उद्देश्य सुख शांति और आनंद की प्राप्ति है । इससे  जीवन के सभी पक्षों में विकास  संभव है। मनुष्य जीवन के विभिन्न पक्ष हैं शारीरिक पक्ष,  मानसिक पक्ष, बौद्धिक पक्ष, सामाजिक पक्ष, भावनात्मक पक्ष , साधनात्मक पक्ष,  नैतिक पक्ष और आध्यात्मिक पक्ष। सभी पक्षों में विकास करना ही सर्वमुखी विकास कहलाता है।

अब प्रश्न पैदा होता है कि वह कौन सी विधि है जिसका अभ्यास करने से सर्वमुखी विकास संभव है। योगी , योगियों , मनीषियों, महापुरुषों ने इस पर गहराई  से विचार किया और अंत में इस निष्कर्ष पर पहुंचे की योग मार्ग ही इस उद्देश्य की प्राप्ति कर सकता है। अब हम विभिन्न पक्षों के बारे में थोड़ा थोड़ा विचार करेंगे । ये पक्ष निम्नलिखित है –

शारीरक पक्ष (Physical Aspect) – योगाभ्यास करने से शरीर स्वस्थ रहता है। एक कहावत भी है – पहला सुख निरोगी काया। रोगी मनुष्य धर्म का पालन भी नही कर सकता।संस्कृत का एक श्लोक है “शरिरमाध्यम् खलु धर्म साधनम् ” अर्थात तंदरुस्त शरीर ही धर्म के पालन करने का साधन है।

मानसिक पक्ष (Mental Aspect)–  नित्य प्रति योग करने से मानसिक पक्ष का विकास होता है , वास्तव में सुखी व्यक्ति वही है, जिसका शरीर तंदरुस्त है और विचार ऊँचे है। एक कहावत है ” जिसके ऊँचे विचार निरोगी काया, उसके पास माया ही माया।

बौद्धिक पक्ष (Intellectual Aspect) – बौद्धिक पक्ष विकास का अर्थ है पढाई लिखाई में रूचि बढ़नी । जो लोग योग में रूचि रखते है, उनकी जिज्ञासा , वृत्ति और अंत ज्ञान में ही वृद्धि होती है।

सामाजिक पक्ष (Social Aspect)-  समाज सेवा में रुचि होना । योग से निःस्वार्थ भाव से दूसरों की सेवा  करने का भाव बढ़ता है । एक कहावत भी है – अपने लिए जीना तो आम कहानी है , दुसरो के लिए जीना जिंदगानी है। समाज की सेवा ही परमात्मा की सेवा है।

भावनात्मक पक्ष (Emotional Aspect) – भावनात्मक पक्ष के विकास का अर्थ है दुसरो के सुख में सुख का अनुभव करना और दुःख में सहानुभूति दिखाना ।एक महापुरुष के शब्दों में -“जो धारणा , ध्यान और समाधी लगाता है , वह योगी है और जो दूसरों के सुख में सुख का अनुभव करता है और दुःख में सहानुभूति दिखाता यही वह परम योगी है ।”

सृजनात्मक या सौंदर्य पक्ष (Aesthetic Aspect) – इस पक्ष में विकास का अर्थ है सुंदरता की प्रशंशा करना। कोई अच्छा कवि है, संगीतकार है , अच्छा कलाकार है , खिलाडी है, वक्ता है उन सबकी प्रशंशा करके गूणों में वृद्धि सहजनात्मक पक्ष है । योगाभ्यास करने से इस गुण में भी वृद्धि होती है ।

नैतिकता (Moral Aspect)- यह योग करने से नैतिक गुणों में भी विकास होता है । अहिंसा , सत्य , प्रेम , क्षमा, नम्रता आदि गुणों में वृद्धि योगाभ्यास से आती है । संस्कृत का एक श्लोक है “सदयं हृदयं यस्य भाषितं ,सत्य भूपितम् काया परहिते यस्य कलिस्तस्य करोति किम्।” इस श्लोक का अर्थ है जिसके हृदय में दया है , वाणी, सत्य से सुशोभित है, जिसका शरीर परहित में लगा हुआ है, काल भी उसका क्या बिगाड़ सकता है।

अध्यात्मिकता (Spiritual Aspect) – अध्यात्म दो शब्दों की संधि से बना है अधि-आत्म । अधि का अर्थ है अध्ययनरत और आत्म का अर्थ है आत्मा । यह पक्ष आत्मा या परमात्मा के अध्ययन से सम्बंधित है । आत्मा , परमात्मा का अध्ययन  या परम सत्ता का अध्ययन सभी धर्मों का मूल है। यह पक्ष सभी धर्मों का सैद्धान्तिक पक्ष है जिसमे योगाभ्यास करने से विकास होता है।

इस लेख का सार यही है कि नित्य प्रति योगासन , प्राणायाम , ध्यान करने से मनुष्य का सर्वांगीण विकास (total development) होता है और मनुष्य पूर्णता की ओर अग्रसर होता है। जीवन के सभी पक्षों में विकास होने से ही सुख , शांति और आनंद की प्राप्ति होती है । Remember the quotation , “For all those afflicted with worldly ills , yoga is the only alchemy.”। इसलिए सभी को चाहिए की वह अपना सर्वांगीड़ विकास हेतु रोजाना योग करें।

आयुर्वेद आपके जन्म से लेकर मृत्यु तक महत्वपूर्ण योगदान देता है। आपका सकारात्मक या नकारात्मक होना , आपका हँसना, रोना , खाना , पीना हर एक बात की कुशलता इस बात पर निर्भर करती है कि आपने अपने जीवन में आयुर्वेद को कितना अपनाया है। इसी प्रकार की और जानकारी के लिए आप आयुर्वेद के 16 संस्कारो को जान सकते है ( आयुर्वेदीय जीवन पद्धति : 16 संस्कार) , अपने महत्वपूर्ण सुझाव हमे कमेंट सेक्शन में देना न भूलें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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