जानें कैसे करें घरेलू उपचार से अस्थमा को जड़ से खत्म।

इंसान बीमारियों से कितना भी बचे लेकिन बदलती जीवनशैली और बढ़ता प्रदूषण उसे बीमार बना ही देता है। कई बीमारियाँ तो ऐसी हैं जो पूरी जिंदगी इंसान का साथ नहीं छोड़ती। उन्हीं बीमारियों में से एक है अस्थमा। जिसे लोग दमा के नाम से भी जानते है।

अस्थमा क्या है – जिस तरह भोजन पचाने के लिए पाचनतंत्र होता है उसी तरह सांस लेने के लिए श्वसन तंत्र होता है। श्वसन तंत्र की मदद से ही इंसान शरीर में मौजूद कार्बनडाई ऑक्साईड को बाहर छोड़ता है और ऑक्सीजन को अन्दर लेता है। इस प्रक्रिया को इंसान इतनी आसानी से करता है की उसे पता भी नहीं चलता वो सांस ले रहा है या नहीं। अपने दूसरे काम के साथ-साथ सांस लेने का काम बड़ी ही सरलता के साथ चलता रहता है। लेकिन जब इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा आये। शरीर में ऑक्सीजन की कमी लगे, इसकी कमी को पूरा करने के लिए जल्दी-जल्दी सांसें लेनी पड़े, सीने में दबाव पड़े, बहुत अधिक खांसी आये, इस स्थिति को ही अस्थमा कहते है।
ऐसी स्थिति तब बनती जब किसी व्यक्ति की श्वांसनली में सूजन आ जाती है और वो सिकुड़ जाती है। ऐसा होने पर सांस लेने और छोड़ने के लिए जगह नहीं बचती, तब अस्थमा के रोगी को सांस लेने या छोड़ने में बहुत जोर लगाना पड़ता है। इस कारण रोगी को जल्दी-जल्दी और छोटी-छोटी सांसे लेनी पड़ती हैं। इसे ही अस्थमा अटैक कहते हैं।

अस्थमा होने का कारण – अस्थमा किस कारण होता है इसके वास्तविक कारण की खोज अभी तक कोई नहीं कर पाया लेकिन जैसा कि हम सभी जानते है कुछ लोगों का शरीर कई तरह की एलर्जी से प्रभावित हो जाता है। उसी प्रकार कुछ लोगों की श्वांसनली की मांसपेशियाँ भी एलर्जी से प्रभावित हो जाती हैं जिस कारण वे सिकुड़ जाती हैं और उनमें सूजन आ जाती है। तो इस तरह कई लोग एलर्जी को एक कारण मानते हैं। इसके साथ-साथ कई और भी कारण हैं जैसे-

  • बहुत अधिक धूल मिट्टी वाली जगहों पर अधिक समय तक रहना या काम करना।
  • घर में किसी पालतू जानवर के अधिक संपर्क में रहना।
  • हवा में पॉल्यूशन की मात्रा का अधिक बढ़ना।
  • ब्रोंकाइटिस या साइनसाइटिस संक्रमण होना।
  • धूम्रपान के अधिक उपयोग करना।
  • अलग-अलग तरह की एलर्जी का होना।
  • महिलाओं में हार्मोनल बदलाव होना।
  • कुछ विशेष प्रकार की दवाओं के से प्रभाव होना।
  • तनाव या भय से।
  • ज्यादा नमक खाने से।
  • और कई बार अस्थमा विरासत में भी मिलता है यानी यदि आपके परिवार का कोई सदस्य इससे प्रभावित रहा है तो आप भी हो सकते हैं।

अस्थमा के लक्षण –

अस्थमा के कुछ शुरूआती लक्षण होते हैं अगर इन्हें पहचान कर किसी ने उपचार शुरू कर दिया या सतर्कता बरती तो उसका अस्थमा ठीक हो सकता है।

  • बार-बार छींक आना।
  • सर में दर्द रहना।
  • चिड़चिड़ापन।
  • नाक से पतला पानी सा पदार्थ निकलना।
  • नाक भरी-भरी सी रहना।
  • खाँसी बार-बार आना और कफ के साथ आना।
  • गले और ठोड़ी पर खुजली।
  • थकावट महसूस होना।
  • आँखों के नीचे काले धब्बे बनना।
  • ठीक से ना सो पाना।
  • व्यायाम करते समय साँस लेने में परेशानी।
  • साँस लेने में घरघराहट।
  • साँसों की कमी का एहसास होना।
  • सीने में दबाव रहना।

अस्थमा के घरेलू उपचार –

ज्यादातर डॉक्टरों का मानना है कि अस्थमा को पूरी तरह ठीक कभी नहीं किया जा सकता है लेकिन कुछ घरेलू नुस्खों से इस पर काबू पाया जा सकता है। जैसे –

तुलसी के पत्ते –
तुलसी के पत्ते अस्थमा रोगी के लिए वरदान के समान है। तुलसी पत्तों के साथ काली मिर्च पीस कर खाने से अस्थमा काबू में रहता है। इसके अलावा तुलसी को पानी के साथ पीस कर उसमें शहद डालकर खाने से भी अस्थमा के रोगी को बहुत आराम मिलता है।

अदरक –
अदरक अस्थमा रोगी के लिए कारगर औषधी है। इसके साथ तुलसी को पीसकर उसमें शहद ड़ालकर खाने से अस्थमा नियंत्रण में आता है। अदरक को एक और तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है गरम पानी में अदरक के साथ लहसुन की 2 3 कलियाँ डालकर अच्छी तरह उबालने के बाद इस काढ़े को पीने से अस्थमा में आराम मिलता है।

मैथी दाना –
मैथी दाने का काढ़ा बनाकर पीने से अस्थमा रोगी को बहुत फायदा होता है। इस काढ़े को बनाने के लिए एक चाय वाली चम्मच मैथी दानों को 2 कप पानी में मिलाकर उबालें और जब एक कप पानी रह जाये तब इसे धीरे-धीरे पीये। इस काड़े से बेहतर इलाज तो कुछ भी नहीं।
अजवाइन –
दमा रोगी अजवाइन को पानी के साथ मिलाकर उबालें और इसकी भाप लें। इससे बहुत आराम मिलता है।

लौंग –
5-6 लौंगों को 1 गिलास पानी में तकरीबन 5 मिनट तक उबाले और छानकर चाय की तरह दिन में दो या तीन बार इसे दोहरायें। ऐसा करने से अस्थमा रोगी अच्छी तरह सांस लेता है और इससे सीने में भारी पन भी नहीं रहता।

अस्थमा रोगी रखें इन बातों का खास ध्यान –

  • अस्थमा रोगी धूम्रपान ना करें, इससे उनकी हालत ज्यादा बिगड़ सकती है।
  • कम मिर्च मसालों वाले भोजन का सेवन करें।
  • गुस्से और तनाव से बचें।
  • पालतू जानवरों को 7 दिन में एक बार जरूर नेहलाएं। उसे अपने साथ ना सुलाएं।
  • शराब और तम्बाकू से भी दूरी बनाएं।
  • अस्थमा अटैक के दौरान खबराएं ना, सावधानी से काम लें, घरवाले भी इस बात का खास ख्याल रखें।

 

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