अस्थमा (Asthma) का जड़ से इलाज – अब घरेलु नुख्सों से

आयुर्वेद के अनुसार पाचन प्रणाली , आंतो में गड़बड़ी होने के कारण अस्थमा (Asthma) होता है । इसमें वात, पित्त , कफ में विकृति आने से अस्थमा होता है।(वात, पित्त, कफ की अधिक जानकारी के लिए इस लिंक और जाए- शरीर में बिमारियों का कारण : त्रिदोष ).

वातज अस्थमा – वातीय अस्थमा में सुखी खांसी होती है । छींके आती है। मुख सूखता है, त्वचा में खुश्की हो जाती है, रोगी को अक्सर कब्ज रहती है। यह सुबह शाम तंग रहता है।

पित्तज अस्थमा – पित्तज अस्थमा में खांसी में सांय – सांय सी आवाज होती है तथा खांसी के साथ बलगम भी आता है । बुखार आता है तथा पसीना भी आता है। यह दोपहर तथा मध्यरात्रि तक तंग करता है।

कफज अस्थमा – इसमें खांसी के साथ सफ़ेद बलगम आता है । इसमें मरीज का श्वास लेते समय सांय सांय की आवाज आती है। रोगी जल्दी जल्दी श्वास लेता है।

अस्थमा (Asthma) के अमान्य कारण

  1. सदैव कब्ज रहना , पेट साफ न होना ।
  2. रक्त दूषित होने पर।
  3. ठण्ड लग जाना या निमोनिया होना
  4. प्रदूषित वातावरण के रहना

5.एलर्जी के कारण जैसे धुल, धुआं, फूलों की खुशबू, दवाइयों की महक, पोलिश, भूसे से, पुराने कपड़ो के गंध से, कुत्ता बिल्ली, जानवरो के संपर्क में जाने से , फैक्ट्री , कारखानों के केमिकल के गंध से आदि बहुत सारे कारणों से भी अस्थमा  की शिकायत हो सकती है।

अस्थमा (Asthma) में प्राकृतिक चिकित्सा

  1. दमा में उपवास चिकित्सा अत्यंत लाभप्रद है। रोज जलनेति करें।
  2. निम्बू पानी का एनिमा देकर प्रातः पेट साफ़ करें ।
  3. गर्म पानी में हाथ डुबाकर देखें।
  4. रीढ़ में गर्म तेल से सुबह शाम मालिश करें ।
  5. रोज प्राणायाम में नाड़ी शोधन , भस्त्रिका , कापालभाति करें।

घरेलू उपचार

  1. रोज गर्म पानी में लहसुन चूर्ण, सोंठ चूर्ण , आधा आधा चम्मच तथा दो चम्मच शहद मिलाकर पीएं , लाभ होगा।
  2. हल्दी पिसी हुई पानी में उबाल कर छाती पर गर्म गर्म लेप करें , आराम मिलेगा ।
  3. रोज सोंठ, काली मिर्च , तुलसी के पत्ते, बड़ी पीपल, लौंग कूट कर 2 चम्मच दवा 3 कप पानी में गुड़ डालकर काढ़ा बनाकर गर्म गर्म एक एक कप रोज सुबह शाम पिएं।
  4. अडूसा की जड़ का चूर्ण 3-3 ग्राम शहद के साथ सुबह शाम दो सप्ताह सेवन करें , लाभ होगा ।

अस्थमा (Asthma) में आयुर्वेदिक उपचार

  1. श्वासहर चूर्ण 1-1 चम्मच शहद के साथ सुबह शाम लें। 45 दिन करें।
  2. लक्ष्मी विलास रस तथा श्वासकुठार रस की 2-2 गोली एक घंटे के अंतराल में सुबह शाम गर्म पानी से लें। 45 दिन करें।
  3. अभ्रक कल्च को एक गोली गर्म पानी से प्रातः कुछ दिन लें ।
  4. च्यवनप्राश एक-एक चम्मच दिन में 2-3 बार सेवन करें।

नोट – सभी उपचार किसी चिकित्सक की देख रेख में करें। दवा की मात्रा समय आवश्यकतानुसार कम ज्यादा कर सकते हैं।सभी उपचार एक साथ न करें।

अस्थमा का रोग अक्सर लोगो को परेशान करती है।  इस रोग के बढ़ जाने पर यह जानलेवा भी साबित हो जाती है। लेकिन भारतीय चिकित्सा पद्धति में अपने रोज़ाना की ज़िन्दगी में छुटपुट बदलाव से ही अस्थमा तथा और भी अनेको रोगों में चमत्कारी बदलाव आ सकते है । जरुरत है तो बस ईमानदारी से बताये गये नियमो को पालन करने का। अगर आपको हमारा ये ब्लॉग पसंद आया हो तो इसे ratings देना न भूले , साथ ही अपने महत्वपूर्ण सुझाव कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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