अब बिना किसी मेहनत अनेक रोगों को दूर भगाएं – आकाश मुद्रा (Akash Mudra) से

प्रस्तावना

आकाश का एक गुण है – अवकाश , स्थान देना। दूसरा गुण है शब्द । शब्द को ब्रह्मा माना गया है – ‘शब्दैव ब्रम्हा ‘। शब्द ध्वनि तरंगे है। ये तरंगे आकाश में फैली हुई है। ध्वनि तरंगों को ग्रहण कर हम आकाशवाणी से रेडियो ध्वनि तरंगे सुनते है। बाहर आकाश अवकाश देता है। वैसे ही भीतर भी आकाश फैला हुआ है । बाहर आकाश में तत्वों की कमी है और अधिकता से भी असंतुलन पैदा हो जाता है।

आकाश का तीसरा गुण है शून्यता, खालीपन । आकाश में स्थान खली होगा तभी वह भर सकता है। भरे हुए आकाश में क्या भरा जायेगा? योग शास्त्र हृदयाकाश में ध्यान के अभ्यास का निर्देश देता है। हृदय पर ध्यान करने से भावधारा निर्मल होती है। मध्यमा अंगुली और हृदय का परस्पर सम्बन्ध है।

आकाश मुद्रा (Akash Mudra) विधि

अंगूठे को अगले पोरे को मध्यमा (सबसे बड़ी अंगुली) अंगुली के  अग्रभाग से मिलाने पर आकाश मुद्रा बनाती है।

आसन

वज्रासन में  आकाश मुद्रा का अभ्यास अधिक शक्तिशाली होता है। ध्यान के अन्य आसनों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

समय

एक बार में 48 मिनट तक तथा कम से कम 16 मिनट तक करे। साथ ही यह भी कोशिश करे की इस मुद्रा को आप नियमित रूप से  प्रयोग में ला रहे है।

परिणाम

  1. आकाश मुद्रा से शून्यता दूर होती है।
  2. सुनने की शक्ति का विकास होता है।
  3. कान बहना , कर्ण पीड़ा आदि कानो के दोष दूर होते है।
  4. हृदय रोग एवं उसके दोषो को दूर करने में सहायक है
  5. अस्थियाँ मजबूत बनती है।

विशेष

मध्यमा अंगुली में साइनस के बिंदु है। उनके दबाव से सर्दी , जुकाम का निवारण होता है । अग्नि व शनि तत्त्व के मिलन से आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है। जप के समय भी हाथ को हृदय के पास रखते है। माला के मनको के समृद्धि और ऐश्वर्य के लिए मध्यमा अंगुली से आगे सरकाते है । आकाश मुद्रा से  व्यक्ति अभय बनता है। आकाश मुद्रा से अभ्यास व्यक्ति के शरीर में स्फुरण- शक्ति और जागृति उत्पन करता है । आकाश मुद्रा के प्रयोग के समय धैर्य बनाये रखना भी नितांत अपेक्षित है ।उससे ही व्यक्ति अपने इच्छित लक्ष्य को प्राप्त करता है।

सावधानियां

  1. मुद्रा बनाकर हाथों को उल्टा नही रखना है ।
  2. आकाश मुद्रा चलते समय नही करनी चाहिए।
  3. भोजन करते समय इस मुद्रा को नही करना चाहिए।

आकाश मुद्रा का सबसे लाभदायक तथ्य यही है कि इसको करने में आपको कोई मेहनत नही करनी पड़ती है। इससे होने वाले लाभ आज के युग में आपके होने वाले खर्चों से तो बचाएगा ही साथ ही इसको अपने जीवन में अपनाने से कोई साइड इफ़ेक्ट भी नही है। जरुरी नही की जब आपको कोई परेशानी हो तब ही आप इस मुद्रा को प्रयोग में लाये , अपने रोज़मर्रा की जिंदगी में भी आप इसे नियमित रूप से प्रयोग में ला सकते है।

आकाश मुद्रा की  तरह ही सूर्य मुद्रा भी लाभदायक है । सूर्य मुद्रा के बारे में अधिक जानकारी के लिए ( बिना मेहनत के पाइये मोटापे से छुटकारा -सूर्य मुद्रा ) दिखाये गये लिंक पर जाये। साथ ही अपने महत्वपूर्ण सुझाव कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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