कमजोरी को दूर भगाये – गिलोय

गिलोय

  • इसको आयुर्वेद में अमृता कहा गया है और वास्तव में यह अमृत के ही सामान औषधि है। अनेक रोगों से पीड़ित व्यक्ति को जब कोई दवा ठीक न कर पाये, तब रामबाण दवा के तौर पर गिलोय को दिया जाता है। यह पुराने रोगों को शत-प्रतिशत तौर पर समाप्त कर देती है।
  • हिंदी में इसे अमृता, गिलोय, गुर्च, गुलबेल, गुडूची, अंग्रेजी में गेलो व लैटिन में टिनोस्पोरा कॉर्डिकोलिया( Tinospora cardiocolia ) कहते हैं।
  • शरीर की जीवनी शक्ति को और भी अधिक मजबूत करने व अन्य विकृतियों को दूर करने के लिए आयुर्वेद में चार जड़ी बूटियों का विशेष महत्व है- आंवला, गिलोय,अर्जुन व जीवंती।

औषधीय उपयोग

  • मुख्यतः इसके तना व शाखाएं सत्व निकलने के उपयोग में आती हैं परंतु जड़ , फल, व पत्ती का भी उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है।

तना

  • तने में विभिन्न ग्लुकोसाइड्स तथा अलकॉलोइड्स होते है।
  • इसके तने को वर्षा ऋतु से पहले काटकर सुखा लिया जाता है। यह बाजार में गुडूची के नाम से मिलता है। वैसे जहाँ तक संभव हो ताजा गिलोय का ही उपयोग करना चाहिये।
  • गीली गुडूची के टुकड़े की माला पहनना पीलिया में लाभकारी होता है।
  • गुडूची को सोंठ तथा पीपरामूल के साथ मिला कर पीने से वातज्वर दूर होता है।
  • गिलोय तथा सतावरी का काढ़ा पीने से श्वेतप्रदर में लाभ होता है।
  • गिलोय तथा ब्राम्ही का सेवन करने से दिल की धड़कन नियंत्रित रहती है।
  • गिलोय स्त्व इलायची तथा वंशलोचन को शहद के साथ लेने से क्षय रोग में लाभ होता है।
  • गिलोय तथा सरिया का काढ़ा रक्त विकार को दूर करता है।
  • गिलोय तथा अश्वगंधा को दूध में पकाकर लेने से बन्ध्त्व दूर होता है।
  • गिलोय , ब्राम्ही व शंखपुष्पी चूर्ण को आंवले के साथ लेने से रक्तचाप ( blood pressure)नियंत्रित रहता है।
  • गिलोय, नीम की छाल , धनिया , चन्दन का काढ़ा पित्त,कफ,ज्वर में लाभकारी होता है।
  • इसके काढ़ा में मारीच चूर्ण तथा शहद मिला कर पीने से सिरदर्द में लाभ मिलता है।
  • इसके रस को आंवले के रस के साथ लेने से नेत्र रोग में लाभ होता है।

जड़

  • यह वमनकारी होती है।
  • जल के साथ पीसकर लगाने से कुष्ठरोग में लाभ होता होता है।
  • जड़ का काढ़ा सर्प विष को दूर करता है।
  • इसकी जड़ें दमा में फायदा देती हैं।

फल

  • सूखे फल का पाउडर , घी या शहद के साथ लेना अच्छे टॉनिक का कार्य करता है।
  • पीलिया व गठिया में भी लाभदायक है।

पत्ती

  • इसमें सबसे ज्यादा प्रोटीन होता है। साथ में कैल्शियम व फॉस्फोरस की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है। पत्ती का रस गठिया रोग में लाभकारी है।
  • इसे दूध के साथ लेप करने चेचक में हितकारी है। पत्ती के रस का तक्र के साथ सेवन पीलिया में फायदा देता है।

इस की जड़ , फूल, पत्ती व फल सभी लाभदायक हैं परंतु बाजार में इसका तना या तने से निकाला गया स्त्व ही ज्यादा बिकता है। यह एक बेल के रूप में होती है जो अन्य पेड़ पौधे का सहारा ले कर बढ़ती है। जिस भी पौधे का यह सहारा लेती है, उसी के गुण इसमें आ जाते हैं। इस दृष्टि से नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय की बेल श्रेष्ठ मानी जाती है।

जिस प्रकार गिलोय हमारी बहुत सी बीमारी को ठीक कर हमें लाभ देता है उसी प्रकार शहद भी हमारे लिए महत्वपूर्ण है। शहद के बारे में अधिक जानने के लिए दिये गये लिंक पर जाएँ ( बस एक चम्मच शहद (Honey) और रोगों का जड़ से खत्म करें ) । अपने महत्वपूर्ण सुझाव हमे कंमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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