गर्भावस्‍था (PREGNANCY) में योग करने से मां और बच्‍चा दोनों रहते हैं फिट

योग हमारी सेहत के लिए कितना फायदेमंद हैं, शायद यह बात हमें आपको बताने के जरूरत नहीं है। जी हां योग से ना केवल हमारी सेहत अच्‍छी रहती हैं बल्कि हमें तरोताजा भी महसूस होता है। इसलिए हम सभी को नियमित रूप से योग करना चाहिए। लेकिन गर्भवती महिलाओं के मन में अक्‍सर यह सवाल आता है कि क्‍या  गर्भावस्‍था (Pregnancy) में योग करना चाहिए या नहीं? या कौन सा योग करना उनके और उनके होने वाले बच्‍चे की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है? अगर आप भी गर्भवती हैं और यह सवाल आपको भी परेशान करता है तो आइए आपकी इस परेशानी को हम दूर कर देते हैं।

गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान किसी भी महिला का सेहतमंद रहना बहुत जरूरी है। क्‍योंकि उसके सेहतमंद होने से बच्‍चे की सेहत भी अच्‍छी रहती हैं। लेकिन इसके लिए गर्भवती को अपने खान-पान के साथ नियमित रूप से योग भी करना चाहिए। क्या आप जानती हैं गर्भावस्था में नियमित रूप से योग करने से ना आप सिर्फ आप हेल्‍दी रहती है बल्कि आप की डिलीवरी भी आसानी से हो जाती है और तो और होने वाले बच्‍चे का विकास भी अच्‍छे तरीके से होता है। आइए सबसे पहले जानें कि गर्भावस्‍था में योग करने के और क्‍या-क्‍या फायदे हो सकते है।

गर्भावस्‍था (PREGNANCY) में योग

फायदों से भरपूर है गर्भावस्‍था में योग 

1.गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान महिलाओं को हार्मोंस के उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन नियमित योग हार्मोंस में संतुलन बनाने में बेहद ही फायदेमंद होता है।

2.योग के दौरान बहुत सी महिलाओं को ठीक से नींद नहीं आती हैं लेकिन योग से ना केवल उन्‍हें अच्‍छी नींद आती है बल्कि तनाव भी दूर होता है।

3.योग से पेट संबंधी समस्याओं को आसानी से दूर किया जा सकता है।

4.योग से गर्भवती के शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बेहतर तरीके से होता है।

5.शरीर से विषैले तत्वों बाहर निकालने में मदद मिलती है।

6.गर्भावस्‍था (Pregnancy) में रोजाना योग करने से ब्लड प्रेशर नॉर्मल रहता है और शुगर का स्‍तर भी नियंत्रित रहता है।

7.गर्भावस्था के दौरान योग करने से बदलते मूड, मितली, उल्टी आदि समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है।

आइए अब जानें कि गर्भवती को कौन से योगासन करने चाहिए?

अनुलोम-विलोम

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गर्भावस्‍था (Pregnancy) में अनुलोम विलोम करने से शरीर में ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है, जिससे ब्‍लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। इसके अलावा गर्भावस्‍था के दौरान तनाव मुक्‍त रहने के लिए इस आसन को जरूर करना चाहिए।

अनुलोम-विलोम करने का तरीका

इस योग को करना बेहद ही आसान हैं। शायद आपने पार्क में लोगों को इसे करते हुए भी देखा होगा। जी हां इस योग को करने के लिए आपको सबसे पहले सुखासन में बैठना हैं। फिर अपने बाएं हाथ के अंगूठे से नाक के बाएं छेद को बंद करें और अपनी सांसों को अंदर की ओर खीचें। फिर उसी हाथ की उंगालियों से दाई ओर के छेद को बंद करके अंगूठे को हटाकर बाई ओर से सांस छोड़ें।अनुलोम-विलोम के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएँ (रोजाना सिर्फ 10 मिनट करें अनुलोम विलोम, मिलेंगे ये चमत्कारिक स्वास्थ्य फायदे)।

तितली आसन

तितली आसन

तितली आसन जैसे कि नाम से पता चल रहा है कि इसमें आपकी टांगे तितली की तरह फड़फडाती हैं। इस आसन को आप गर्भावस्‍था में भी कर सकती हैं। इसे करने से शरीर के निचले हिस्‍से में लचीलापन आता है। जिससे डिलीवरी के दौरान महिलाओं को कम परेशानी होती है।

तितली आसन करने का तरीका

तितली आसन करने के लिए अपने दोनों पैरों को सामने की ओर लाकर अपने दोनों तलवों को आपस में नमस्‍कार की मुद्रा में मिला लें। इसके बाद दोनों हाथों से पैरों के पंजे को पकड़कर अपनी टांगों को ऊपर-नीचे करें। ध्यान रहें कि इसे करते समय आपकी पीठ बिल्कुल सीधी होनी चाहिए।

शवासन

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गर्भावस्‍था (Pregnancy) में इस योग को करने से ना सिर्फ महिलाओं का तनाव दूर होता है बल्कि भ्रूण का विकास भी अच्‍छे से होता है।

शवासन करने का तरीका

इस योग आसन को करना बहुत ही आसान हैं। इसमें आपको केवल सीधा लेटकर धीरे-धीरे लंबी सांसे लेनी हैं। जी हां इसे करने के लिए सबसे पहले बिस्‍तर पर सीधा लेट जाएं और अपने शरीर को पूरी तरह से ढीला छोड़ दें। फिर आपको धीरे-धीरे लंबी सांसें लेनी और छोड़नी हैं। शवासन के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएँ (सभी योग आसनों के सबसे आसान – शवासन)।

पर्वतासन

पर्वतासन

गर्भावस्‍था के दौरान एक समस्‍या जो हर गर्भवती को परेशान करती है। जी हां हम कमर दर्द की बात कर रहे हैं। लेकिन इस योग को करने से कमर दर्द को आसानी से दूर किया जा सकता है। साथ ही नियमित रूप से इस योग को करने से आपका शरीर आगे बेडौल भी नहीं होता है।

पर्वतासन करने का तरीका

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पीठ सीधी करके सुखासन में बैठ जाएं। अब सांसों को अंदर लेते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर ले जाएं। और फिर अपनी हथेलियों को नमस्‍कार की मुद्रा में कर  लें। ध्‍यान रहें कि आपकी पीठ की तरह आपकी को‍हनियां भी सीधी होनी चाहिए। कुछ समय इस योग मुद्रा में रहने के बाद वापिस पुरानी अवस्‍था में आ जाएं।

इस लेख को पढने के बाद आपको आपके सवाल का जवाब मिल गया होगा। तो अपनी और अपने आने वाले बच्‍चे की सेहत के लिए आप योग करना कब से शुरू कर रही हैं?

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