घर बैठे करिये थाइरॉइड (Thyroid) का उपचार

जब शारीरिक क्रियाओं में गति लाने वाली थायरॉइड ग्रंथियां ((Thyroid Gland) सही तरीके से काम नहीं करती हैं तो थायरॉइड (Thyroid) की समस्याएं पैदा होने लगती है। इसके कुछ बाह्य लक्षण हैं – थकावट , उदास रहना, वजन बढ़ जाना, सर्दी न सह पाना, अतिनिद्रा, बालों का सूखापन, थूक सटकने में तकलीफ होने आदि। थायरॉइड (Thyroid) की समस्या से मुख्यतः दो तरह की बीमारियां होती है – हैपोथाइरोडिज्म और हैपेरथाइरोडिज्म । बीमारी के लक्षण व्यक्ति विशेष के ऊपर भी निर्भर करते है।

सर्वांगासन

थाइरॉइड (Thyroid) के मरीजों के लिए सर्वश्रेष्ठ है । यह थाइरॉइड (Thyroid) के सभी क्रियाओं को गतिशील बनाता है।

  • पीठ के बल सीधा लेट जाएं। दोनों पावों को और पीठ को उठाएं।
  • इसके लिए कमर को दोनों हाथों का सहारा दें और दोनों पैरों और पीठ को एक सीध में रखें।
  • धीरे – धीरे गहरी सांस लें और थाइरॉइड ग्रंथि पर ध्यान एकाग्र करें।
  • इस स्थिति में कुछ सेकंड तक रहें और धीरे धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं।

थाइरॉइड (Thyroid) के लिए थेरोडिटिस मुद्रा

दोनों हाथों की अंगुलियों को इस तरह मिलाएं की एक हाथ का अंगूठा, तर्जनी और मध्यमा दूसरे हाथ के अंगूठे , तर्जनी और मध्यमा को अच्छी तरह पकड़ लें।

याद रखें कि जब अँगुलियों को मुद्रा के लिए व्यवस्थित करें तो एक ही हाथ की अंगुली के ऊपरी पोर को पकड़ लें। दोनों हाथों की अन्य दोनों अँगुलियों को स्वतंत्र छोड़ दें।

लाभ

इस मुद्रा के नियमित अभ्यास से थाइरॉइड (Thyroid) की समस्या का प्राकृतिक रूप से निदान हो जाता है। थाइरॉइड ग्रंथि (Thyroid Gland) में सूजन होना ही थेरोडिटिस कहलाता है। इस मुद्रा के नियमित अभ्यास से थाइरॉइड ग्रंथि (Thyroid Gland) की सूजन अपने आप कम हो जाती है। यह देखा गया है कि इस मुद्रा के अभ्यास से थाइरॉइड (Thyroid) के मरीजों के शरीर का तापमान नियंत्रित हो जाता है। प्राण मुद्रा और लिंग मुद्रा या अंगुष्ठ मुद्रा भी थाइरॉइड (Thyroid) के मरीजों पर चमत्कारिक प्रभाव डालती है। प्राण मुद्रा का नियमित अभ्यास , शरीर में जीवनी शक्ति प्रदान करता है और अंगुष्ठ मुद्रा के अभ्यास से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है

प्राणायाम

नीचे दी गई विधि से भ्रामरी प्राणायाम के अभ्यास से थाइरॉइड ग्रंथि (Thyroid Gland) ठीक तरह से कार्य करने लगती है। इस प्राणायाम को स्वच्छ और शांत वातावरण में करना चाहिए।

विधि

  • लंबी सांस लें।
  • अपने कानों को दोनों हथेलियों से बन्द के लें।
  • अब दोनों आँखों को बंद कर लें।
  • मुँह को बंद रखें और सर को तानकर धीरे धीरे ऊपर उठाएं ताकि ठोडी ऊपर चले जाए।
  • विशुद्धि चक्र पर ध्यान केंद्रित करें और गर्दन के मध्य नीले रंग का ध्यान लगाएं।
  • अब सांस धीरे धीरे छोड़ते हुए भँवरे की गुंजार की तरह ‘ॐ’ का उच्चारण करें। इस क्रिया को 10 मिनिट तक दोहराएं।

स्वस्थ आहार

  • हरि पत्ती वाली सब्जी और समुद्री खाद्य थाइरॉइड (Thyroid) के मरीजों के लिए लाभकारी रहता है। अधिक कार्बोहायड्रेट लेने से परहेज करें।
  • नारियल में प्राकृतिक रूप से आयोडीन पाया जाता है इसलिए थाइरॉइड के मरीजों को नारियल खाना चाहिए।
  • अन्य तेल या वसा के बदले नारियल तेल का सेवन करना चाहिए।

थाइरॉइड (Thyroid) के रोगी को चाहिए की वो नियमित रूप से योग तथा प्राणायाम करें। जिस तरह थाइरॉइड (Thyroid) को घरेलु उपाय तथा अपनी जीवन शैली में थोड़े बहुत परिवर्तन कर आप इस बीमारी को ठीक कर सकते हैं उसी प्रकार अस्थमा की बीमारी को भी आप अपने जीवन में कुछ थोड़े बहुत परिवर्तन से ख़त्म कर सकते हैं । आयुर्वेद में अस्थमा के इलाज का बड़े ही विस्तृत रूप से वर्णन किया गया है । अस्थमा के इलाज की जानकारी के लिए आप आगे दिए गए लिंक पर जा सकते हैं। ( अस्थमा (Asthma) का जड़ से इलाज – अब घरेलु नुख्सों से ) साथ ही हमारे इस पेज को like करना न भूलें। अपने महत्वपूर्ण सुझाव कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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