योग करते समय कहाँ रहे हमारा ध्यान केंद्र बिंदु (Focus Centre Point) or चक्र?

चक्रों पर ध्यान करते हुए योगासनों का अभ्यास साधक की साधना में चार चाँद  लगा देता है , क्योंकि –

  • हमारा मन सारे संसार की वस्तुओं एवं घटनाओं से हटकर उस अंतरंग शक्ति (intimate power ) पर ठहरने का अभ्यासी हो जाये। मन का यह अभ्यास मन की बाहरी यात्रा करने या भागने की चंचल आदत को आंतरिक एक बिंदु पर स्थिर होकर बैठने से बदलेगा । यही वह अभ्यास है , जिसका वर्णन मन के नियंत्रण के सन्दर्भ में श्री कृष्ण अर्जुन को बताते हैं – अभ्यास और वैराग्य – इसी को सिखाना है।
  • सात चक्र हमारे शरीर के अंदर प्राण शक्ति प्रसारण (broadcasting) के केंद्र हैं। इन पर ध्यान करने से विशेष अंग, जो आसन में प्रभावित होता है , वह प्राण से ओत- प्रोत हो जाता है। अतः उसमे रक्त का भ्रमण , सक्रियता, संदेशवाहिनी, नाड़ियों से सम्बन्ध, अन्य अंगों से समन्वय और इसकी पूरी उपयोगिता , जिसके लिये शरीर में स्थित है, सिद्ध हो जाता है।
  • इन केंद्रों पर ध्यान प्रणाली अपनाने से स्थूल शरीर (gross body) तथा सूक्ष्म शरीर (astral body) दोनों स्थिर होने लगते हैं। यह आसन की विशेष तथा महानतम उपलब्धि है।

चक्रों का स्थान

  1. मूलाधार चक्ररीढ़ के अंतिम छोर के पास मलद्वार (anus) और जननेंद्रिय(genital) के बीच में।
  • इससे मल – मूत्र को भली प्रकार से निष्काषित होने में सहायता मिलती है।
  • यह पृथ्वी तत्व का सूचक प्राण शक्ति का उद्गम (origin) है।
  1. स्वाधिष्ठान चक्र – जननेन्द्रिय मूल के पीछे रीढ़ पर स्थित है।
  • नाड़ियों के सुचारू रूप से संचालन में सहायक है।
  • यह जल तत्व का प्रतीक है।
  1.    मणिपुर चक्र – यह नाभि के पीछे रीढ़ पर स्थित है।
  • यह प्राण का भण्डार है।
  • यह अग्नि तत्व का प्रतीक है।
  1.  अनाहत चक्र – हृदय के पीछे रीढ़ पर स्थित है  ।
  • पूर्णतया शुद्ध , शुद्ध भाव, विश्वबंधुत्व की पात्रता ।
  • यह वायु तत्व का प्रतीक है।
  1.  विशुद्धि चक्र – कंठ (throat) के पीछे रीढ़ पर स्थित है।
  • पूर्णतया शुद्ध , दूरगामी तरंगों को ग्रहण करने की क्षमता रखता है।
  • यह आकाश तत्व का प्रतीक है।
  1. आज्ञा चक्रजहाँ तिलक या बिंदी लगाते है । उस स्थान से लगभग डेढ़ इंच अंदर।
  • मष्तिष्क एवं ग्रंथियों का सुचारू रूप से संचालनकर्ता ।
  • सभी चक्रों का नियंत्रक।
  1. कपाल के नीचे (सिर में) स्थित है ।
  • यह आनंदबोधक है।

अक्सर देखा गया है कि फेसबुक तथा व्हाट्सएप के दौर में हमारा मन एकाग्र नही हो पाता । यह एक वास्तविक सच है कि हमारा मन कभी भी खाली नही बैठ सकता है । इसलिए आयुर्वेद ने इसका तोड़ ध्यानकेद्र बिंदुओं से निकाला है। हर आसन के ध्यान केंद्र बिन्दुओ को निर्दिष्ट किया गया  है। अब आप लोगो को यह सोचने की आवश्यकता नही है कि साधना करते समय हमारा ध्यान किस ओर रहे । आप उपर्युक्त ध्यान केंद्र बिंदुओं में से किसी एक पर अपना ध्यान लगा सकते है , सबके अपने अलग फायदे है। हम जो सोचते है उसका हमारे शरीर पर बहुत बड़ा असर पड़ता है।

आयुर्वेद के हमारे ऋषि मुनियों  ने इसको समझा तथा इसका कई रूप के इलाज से हमारा परिचय करवाया। इसी प्रकार कैंसर जैसे रोगों का भी इलाज आयुर्वेद में बताया गया है । आयुर्वेद के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएँ -( आयुर्वेद चिकित्सा (Ayurveda Therapy) की एक महत्वपूर्ण विधि; पंचकर्म ,  अब कैंसर जैसे जटिल बीमारी का इलाज भी आयुर्वेद में पाएं , आयुर्वेद (Ayurveda) के अनुसार विरूद्ध आहार (against diet) क्या होते है ? और कौन-2 से हैं ? ) साथ ही अपने महत्वपूर्ण सुझाव हमे कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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