निमोनिया (pneumonia) को जड़ से खत्म करने का राम बाण उपाय

निमोनिया (pneumonia) श्वसन-तंत्र के संक्रमण का रोग है। जब मनुष्य के श्वास मार्ग से फेफड़े में इतनी ठंडक पहुँचती है कि फेफड़ो के सैल्स कार्य करना बंद कर दे तो वह निमोनिया के रोग से ग्रसित हो जाता है। यह स्तिथि संक्रमण से भी आ सकती है।

निमोनिया (pneumonia) के लक्षण

इस रोग में फेफड़े और उसकी झिल्लियों में सूजन आ जाती है। आसानी से श्वास – प्रश्वास की क्रिया नही हो पाती। खांसी के साथ तेज श्वास चलती है। सांस लेते समय नासिक फूलती है। पसलियां चलती है तथा पसलियों के भीतर की ओर दर्द होता है और बुखार बना रहता है। रोग हर पल तड़पाता है , सुख की श्वास नही आती। हर उम्र का व्यक्ति इस रोग का शिकार हो सकता है परंतु बच्चो में इस रोग की सम्भावना अधिक होती है।

उपचार

निमोनिया एक असाध्य रोग है परंतु योगाभ्यास, परहेज , घरेलु उपचार एवं भोजन पर नियंत्रण तथा मुद्राओ का अभ्यास कर इस रोग से निजात पाई जा सकती है।

योगाभ्यास आसन और प्राणायाम के अभ्यास से फेफड़ो तथा उसकी झिल्लियों की सूजन कम हो जाती यही। बैक्टीरिया का संक्रमण ख़त्म हो जाता है और फेफड़ो की सेल्स सामान्य स्तिथि में कार्य करने लगता है। श्वास – प्रश्वास की क्रिया सहज रूप से होने लगती है। इस सन्दर्भ में प्रमुख आसन है – , ताड़ासन, गौमुखासन, उष्ट्रासन, भुजंगासन,शलभासन,धनुरासन, पवनमुक्तासन, मकरासन, चक्रासन तथा मत्स्यासन।

प्रमुख प्राणयाम

गहरे लंबे श्वास , कापालभाति प्राणायाम, भस्त्रिका प्राणायाम तथा सूर्यभेदी प्राणायाम।मुद्राओं का अभ्यास भी काफी प्रभावी माना गया है। निम्न मुद्राओं का नियमित रूप से अभ्यास करने पर निमोनिया व अन्य श्वास रोगों पर नियंत्रण पाया  जा सकता है :

सूर्य मुद्रा  – इस मुद्रा के अभ्यास से दायां स्वर चलने लगता है जिससे शरीर की ठंडक मिटती है, अग्नि ताप बढ़ता है और सर्दी, जुकाम, दमा तथा निमोनिया के रोगों में नियंत्रण आता है। ( बिना मेहनत के पाइये मोटापे से छुटकारा -सूर्य मुद्रा )

अपान मुद्रा–  इस मुद्रा के अभ्यास से श्वास नली के रोगों पर नियंत्रण आता है। ( कैसे हो शरीर के मल पदार्थ का विसर्जन : अपान मुद्रा )

लिंग मुद्रा – इस मुद्रा के अभ्यास से फेफड़ों का संक्रमण दूर होता है तथा मौसम परिवर्तन से होने वाले रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है।

घरेलु उपचार

  1. दिन में 2-3 बार भाप लें।
  2. विटामिन c से भरपूर वस्तुएं अधिक खाएं जैसे – निम्बू, संतरा , मौसमी , आंवला।
  3. गर्म पानी पीएं।
  4. आधा चम्मच अदरक का रस और आधा चम्मच शहद मिलाकर दिन में 2-3 बार लें।
  5. तुलसी की तीन पत्तियां और तीन काली मिर्च घोट कर एक चम्मच पानी के साथ पीएं।
  6. लहसुन की 5 कलियों का रस निकालकर पीएं।
  7. दो लौंग, 2 काली मिर्च, छोटा टुकड़ा अदरक , 7 तुलसी की पत्तियां, थोड़ी चाय पत्ती डेढ़ कप पानी में उबालें। एक कप रहने पर चीनी डालकर रात को सोते समय पीएं।

भोजन

  1. भोजन हल्का, सादा और सुपाच्य लें ।
  2. भोजन चबा चबा कर खाएं।
  3. हरी सब्जियों का सूप लें।
  4. तला भुना व मिर्च मसाले वाला भोजम न करें ।
  5. कोई भी ठंडी वास्तु जैसे आइसक्रीम, शीतल पेय, फ्रिज का पानी न पीएं।
  6. जंक फूड , फास्ट फूड तथा डिब्बे बन्द खाद्य पदार्थों के बचें।

परहेज

  1. मिठाई, नमकीन, खटाई, मूली, दही , चावल, केला न खाएं।
  2. नमी वाले स्थान, धुल-धुएं, मिट्टी से बचे।
  3. सर्दी में बहुत सवेरे स्नान न करें ।

बचाव

  1. खली पेट 4-5 पत्तियां तुलसी की पानी से निगल लें ।सर्दी के कारण होने वाले रोगों से बचाव होगा ।
  2. दायां स्वर (सूर्य स्वर) अधिक समय तक चलाएं।
  3. रात को बाएं करवट में सोएं।
  4. 2 चम्मच शहद नित्यप्रति लेने से फेफड़े इतने शक्तिशाली हो जाते है कि श्वास संबंधी कोई विकार उत्पन्न नही होते।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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