पेट के सभी बीमारियों से दूर रखें –पादोत्तान आसन

यदि हमारा पेट ठीक हो तो रोगों का आक्रमण कम होता है। पेट के सभी अंगों को पुष्ट रखने का मानो पूरा उत्तरदायित्व इसी आसन का है। इसलिए पादोत्तान आसन एक महत्वपूर्ण आसन है।

  • इससे बड़ी आंत (कोलन नाड़ी) विशेषतः प्रभावित होने के कारण पुरानी से पुरानी कब्ज टूटती है तथा जठराग्नि तेज़ होती है।
  • नाभि को ठीक स्थान पर लाने से इस आसन को बहुत सार्थकता है।
  • हर्निया (आंत नीचे उतरना) का रोग इससे ठीक होता है।
  • शायटिका नाड़ी के दोष इससे समाप्त होते हैं।
  • महिलाओं के मासिक धर्म को नियमित बनाने में सहायक है। योनि का संकोचन होता है।
  • हाथ और पैरों का खिचांव पड़ने से टखने , पिंडलियाँ, जंघाएँ , नितंब , कमर का निचला भाग , हाथों की मांसपेशियां तथा कंधें पुष्ट होते है। पेट के स्नायुओं को बल मिलता है।

पादोत्तान आसन विधि

कमर के बल लेट जाएं । हाथ बराबर में सटाकर रखें । दोनों टाँगो को सीधा करें। एड़ी-पंजे मिला लें पंजें ताने और साथ ही हाथों को सर की ओर ले जाकर तानें। कोहनी से हथेली तक का पृष्ठ भाग पृथ्वी पर रखें। एड़ियां पूरे आसन में इसी तरह थोड़ी उठी रहेंगी। यह अवस्था महिलाओं के लिए विशेष उपयोगी है। श्वास भरते हुए दायीं टांग और बायां हाथ आकाश की ओर ताने। पैर का पंजा व हाथ एक दूसरे के समानांतर रहें। दूसरी भुजा एवं टांग यथावत स्थिति में रहें। श्वास सामान्य हाथ और पैर पूर्व स्थिति में ले आए । अब बायां पैर और दायां हाथ श्वास भरते हुए आकाश की ओर तानें। श्वास सामान्य। पूर्व स्थिति में आएं। अब श्वास भरते हुए दोनों हाथ तथा दोनों पैर ऊपर की ओर तानें। श्वास सामान्य । फिर धीरे धीरे वापस आएं । शरीर को ढीला छोड़ दें ।

ध्यान का केंद्र – मणिपुर चक्र (ध्यान केंद्र बिंदु के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएँ) ( योग करते समय कहाँ रहे हमारा ध्यान केंद्र बिंदु (Focus Centre Point) or चक्र? )

ध्यान देने योग्य बात

  • दायां पैर, बायां हाथ ऊपर उठाने से बड़ी आंत का भाग [ऊपर जाने वाली आंत ( ascending colon) पहले प्रभावित होता है। बायां पैर व दायां हाथ ऊपर उठाने पर बड़ी आंत का भाग नीचे जाने वाली आंत व क्षोणिगा (descending colon and segmoid colon) प्रभावित होते हैं। दोनों पैर व हाथ उठाते हुए तिरछी जाने वाली बड़ी आंत (transverse colon) व नाभिमंडल प्रभावित होता है।
  • इसमें विशेष बात ध्यान देने योग्य यह है कि शरीर का खिंचाव किसी भी स्तर पर कम न हो। घुटनी मुड़े नहीं । पंजे आगे की ओर तने रहें।
  • इस क्रिया में अभ्यास को जितना धीरे धीरे करेंगे (हाथ पैर ऊपर एवं वापस लाते हुए ) उतने ही अधिक लाभ की प्राप्ति साधक को होगी।
  • संपूर्ण क्रिया में एड़ियां थोड़ी ऊपर ही उठी रहेंगी, जो अंत में धरती पर कोमलता से रखी जाएँगी।
  • नए साधक को इस अभ्यास में नलों में पीड़ा अनुभव होती है, इसलिए उनको प्रारम्भ में इसका अभ्यास कुछ कम देर करना चाहिये। धीरे धीरे इसका अभ्यास बढ़ाना चाहिए।
  • दायीं टांग एवं बायीं भुजा ऊपर उठाने पर दूसरी टांग व भुजा भी कुछ ऊपर आ जाते हैं। इनके यथावत स्थिति में रहने पर ही नाड़ियों पर सद्प्रभाव आएगा ।

पादोत्तान आसन वाकई हमारे जीवन के लिए वरदान है । इसे अपने जीवन में रोजाना के स्तर पर अपनाएं और लोगों को भी इसे करने की सलाह दें । ताड़ासन का भी हमारे जीवन को स्वस्थ रखने में बहुत बड़ा योगदान है । ताड़ासन के बारे में अधिक जानकारी के लिए आगे दिये हुए लिंक पर जाएँ । ( कद बढ़ाने का राम बाण उपाय – ताड़ासन ) साथ ही अपना कोई भी महत्वपूर्ण सुझाव हमे कमेंट बॉक्स में लिखना भूलें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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