फेफड़ो में टी. बी. (Tuberculosis TB) का ऐसा घरेलु उपाय जिसके आगे महंगे से महंगा इलाज भी फेल

टी. बी. (Tuberculosis TB) के लक्षण

गले की साधारण खराश या थोड़ी सी सूखी खाँसी होना इसका प्रारंभिक लक्षण है। यह खांसी खतरे का सूचक है । बिना किसी कारण के हाथ पैरों में या सारे शरीर में अधिक पसीना आना , रोग के बढ़ने पर थूक के साथ खून भी आता है । सीने में पीड़ा होना , बुखार रहना जो 100 डिग्री तक चला जाता है । रोगों के बढ़ने पर खांसी , ज्वर व मूर्छा आने लगती है तब रोगी को निमोनिया , अतिसार, यकृत रोग भी घेर लेते है । शरीर का क्षय हो जाता है । शरीर सूख जाता है ।

टी. बी. (Tuberculosis TB) के कारण

दोषी भोजन, प्राकृतिक शारीरिक तरल वेगों को रोकना , काम सुधा पर नियंत्रण न करना , अपनी शारीरिक व मानसिक क्षमता से अधिक परिश्रम करना, भोजन का अभाव होना या असंतुलित आहार , अधिक भोजन करना, निराश व दुखी जीवन , प्रदूषण, वात पित्त कफ का दूषित होना (वात पित्त कफ को जानने के लिए इस लिंक और जाएं- शरीर में बिमारियों का कारण : त्रिदोष ), कब्ज़, उन जानवरों का दूध या मांस खाना जिन्हें टी. बी. हो या अन्य रोग हों, वायु , अग्नि व ग्रंथियों का सही ढंग से काम न करना।

उपचार

  • प्रातः 1-2 लीटर गर्म पानी पीकर (उसमे नमक और निम्बू मिलाकर) विप्रीतकरणी मुद्रा को तीन मिनट करें । योग मुद्रा 6 बार करें, पवन मुक्तासन 3 बार करें, पादहस्तासन (खड़े होकर पैर के अंगूठे को पकड़ना) 4 बार करें ( कमजोर अधिक हो तो न करे) ।
  • अग्निसार प्राणायाम 30 बार , लंबे -गहरे श्वास का अभ्यास 6 मिनट तक करें।( भ्रमण करते हुए)।
  • 5-10 मिनट दोपहर में क्षमता अनुसार सूर्य स्नान करें तथा साथ में 2 मिनट लंबे गहरे श्वास लें ।
  • सायंकालीन ज्वर एवं रात्रि में पसीना आता हो तो निम्लिखित अभ्यास करें – 6 मिनट भ्रमण करते हुए लंबे गहरे श्वास लें । स्वर्गासन 2 मिनट , योग मुद्रा 6 बार करें , पश्चिमोत्तान 3 बार, अग्निसार क्रिया 15 बार , गर्म जल क्षमता अनुसार पीना चाहिये।

फेफड़े का क्षय रोग का घरेलु उपाय

  1. लहसुन के ताजे रस में रूई डुबोकर नाक पर बाँध दें । ताकि अंदर जाने वाली श्वास के साथ मिलकर लहसुन का रस फेफड़े तक पहुंचें। लहसुन का रस सूख जाने और बार बार रस छिड़ककर रूई को गीला कर लें। ऐसा करने से फेफड़े का क्षय मिट जाता है। पथ्यबकरी का दूध , चावल , मूंग की दाल की खिचड़ी, परवल खाएं।
  2. घी व मिश्री के साथ बकरी का दूध पीना चाहिए। स्वर्णमालती तथा च्यवनप्राश का सेवन करने से लाभ मिलता है।
  3. अडूसे के पत्ते के 10-50 मिलीलीटर रस में 9-10 ग्राम शहद मिलाकर दिन में 2 बार नियमित रूप से पीने से क्षय लाभ होता है।
  4. क्षय के कारण होने वाली खांसी में गोखरू तथा असगंध के 1 से 2 ग्राम चूर्ण को शहद में मिलाकर चाटने से तथा ऊपर से दूध पीने से लाभ होता है।
  5. 5 ग्राम पिसी हुई शक्कर , 5 ग्राम पिसा हुआ सिन्धवखार , 10 ग्राम शुद्ध शहद तीनो को मिलाकर दिन में 3 बार एक माह तक सेवन करें। भयंकर टी. बी में लाभ होता है।
  6. शीटोप्लादी चूर्ण शहद व मक्खन के साथ आधा चम्मच नित्य तीन बार चाटें।
  7. शुद्ध शिलाजीत एवं शहद, दूध के साथ लें।
  8. लहसुन का हरा पत्ता मसलकर पोटली बाँध कर सूंघने से तथा नित्य हवन का धूआँ लेने से तपेदिक में लाभ होता है।
  9. टी. बी. के बुखार में 11 पत्ते तुलसी, नमक, जीरा व हींग (थोड़ा थोड़ा) , एक ग्लास पानी में निम्बू का रस 25 ग्राम मिलाकर 3 बार कुछ दिन पीना चाहिए।
  10. सेब, आम, अंगूर , गाजर, केला , प्याज, लहसुन, अखरोट, मक्का, शहद , लौकी आदि खाद्य पदार्थ क्षय रोग में लाभदायक है।

आयुर्वेद में सभी बीमारियों का जड़ से इलाज मिलता है । यह सदियों पुराने ऐसे नुक्से है जिन्हें आज हज़ारों वर्षों बाद भी प्रयोग में लाया जा रहा है और इसका लाभ भी प्रत्यक्षतः देखा जाता रहा है । इसी प्रकार निमोनिया जैसी बीमारी का इलाज भी संभव है बस जरूरत है तो अपने दिनचर्या में थोड़े परिवर्तन की । निमोनिया के बारे जानकारी के लिए आप इस लिंक पर जा सकते हैं। ( निमोनिया (pneumonia) को जड़ से खत्म करने का राम बाण उपाय ) साथ ही अपने महत्वपूर्ण सुझाव हमे कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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