बीमारियों को आपके पास न आने दे – मत्स्यासन

इस आसन में मछली जैसी आकृति शरीर की बनती है, इसलिए इसे मत्स्यासन कहते हैं। फेफड़ें , उदर और रीढ़ को विशेष तौर पर यह आसन प्रभावित करता है।

  • गर्दन को पीछे की ओर मोड़ने से श्वास नली के छिद्र में कोई रूकावट नहीं रहती । उसका मुंह भी चौड़ा हो जाता है, जिससे फेफड़ों की प्राणवायु अधिक ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है। रक्त शुद्ध होता है। फेफड़े भी पुष्ट होते है। श्वास संबंधी रोग – दमा , खांसी तथा श्वासनली में सूजन आदि रोग नही होने पाते।
  • पेड़ू में स्थित यौन अंग पुष्ट एवं सुदृढ़ होते हैं। पाचन अंग सुधारते हैं। कब्ज टूटती है।
  • रीढ़ लचीली व स्वस्थ बनती है तथा कमरदर्द दूर होता है। छाती चौड़ी होती है।
  • पद्मासन लगाकर इसका अभ्यास करने में गठिया , टॉन्सिल , मधुमेह , मस्तिष्क विकार तथा नाक का के रोग भी नष्ट होते है ।
  • वायु दोष के कारण शरीर का कंपन एवं नाड़ी – दौर्बल्य आदि रोग दूर होते है ।
  • गर्दन को दाएं बाएं तथा गोलाकार में घुमाने से सर्वाइकल क्षेत्र के साथ मस्तिष्क को रक्त पंहुचाने वाली नदियों में होने वाली रुकावटें दूर होती हैं।

मत्स्यासन की विधि

कमर के बल लेटें । पद्मासन लगाएं । दोनों पंजो को पकड़कर थोड़ा अपनी ओर इस प्रकार खींचे कि कोहनियां पृथ्वी पर लग जाएं । इस स्थिति में कुछ समय रुकें।

दोनों हाथों को कन्धों के पास रखते है गर्दन को अधिक से अधिक पीछे की ओर मोड़े। सिर का माथे के  निकट का भाग पृथ्वी से लग जाये । दोनों हाथों से फिर पैरो के पंजे को पकड़ लें। नितंबों को भी उठा लें। कुछ देर बाद नितंबों को , और फिर कोहनी को धरती पर रख दें । हाथों का सहारा देकर गर्दन को सीधा कर दें। कुछ समय इस अवस्था को बनाये रखें।

दोनों हाथों को नितंबो के नीचे रखें । हथेलियों का रुख पृथ्वी की ओर रहे । कोहनियों के बल अपने धड़ को ऊपर उठा लें । घुटनो को भी थोड़ा सा उठा लें। गर्दन को धीरे धीरे दायीं ओर , फिर बायीं ओर गोलाकार , पहले दाएं से बाएं , फिर बाएं से दाएं घुमाए ।

गर्दन को सिद्ध करें । पद्मासन खोलें। शरीर को ढीला करके विश्राम करें।

ध्यान केंद्र – विशुद्धि चक्र (ध्यान केंद्र बिंदु के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएं ।) ( योग करते समय कहाँ रहे हमारा ध्यान केंद्र बिंदु (Focus Centre Point) or चक्र? )

  • इसमें ध्यान देने योग्य विशेष बात यह है कि इस आसन की पूर्ण अवस्था में नितंबों को अधिक ऊपर उठाएं। जिससे रीढ़ अधिक स्वस्थ एवं लचीली बनती है।
  • ग्रीवाचालन की क्रिया जितनी धीरे धीरे करेंगे, उतना ही लाभ होगा । साधकों को इस क्रिया में गले की नसें चटखतीं हुई महसूस होती हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि गले व सर्वाइकल क्षेत्र के लिए यह क्रिया प्रभावशाली है।
  • यह आसन गृहस्थियों के लिए श्रृंखला में अंतिम आसन है । अतः इसके बाद 3 मिनट का शवासन आवश्यक है।

मत्स्यासन के अलावा सबसे आसान और सबसे अधिक किया जाने वाला योगासन है पद्मासन । बिना जाने ही आप इसे रोज अपने जीवन में प्रयोग में लाते होंगे ।  पद्मासन के बारे में अधिक जानकारी के लिए दिए गए लिंक पर जाएँ । ( अपने शरीर को लचीला बनाएं पद्मासन (Padmasana) से ) अगर आपको मत्स्यासन की जानकारी महत्वपूर्ण लगी हो तो हमारे इस लेख को लाइक करना न भूलें । साथ ही अपने सुझाव हमे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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