मोटापा घटाने में सबसे असरदार आसन – हलासन

इस आसन में शरीर की आकृति किसान के हल जैसी बनने के कारण इसे हलासन कहते हैं। रीढ़ को खिचांव देना इसका मुख्य कार्य है। साथ ही कई ग्रंथियां भी इससे प्रभावित होती हैं।

हलासन के लाभ-

  • रीढ़ तीन इंच से ज्यादा लंबाई में खिंचने से अधिक स्वस्थ्य एवं लचीली बनती है। इससे कद में बढ़ने में मदद मिलती है।
  • हड्डियों से कैल्शियम बाहर नही आता जिसके कारण इसके छिद्रों में दोष या कड़ापन नही हो पाता । साथ ही हड्डियों में रक्त प्रचुर मात्रा में पहुंचता है।
  • समस्त ग्रंथियां – जैसे थाइरॉइड , पैराथायराइड , गुर्दे , तिल्ली, जिगर , पैंक्रियास , एड्रिनल , सेमिनल आदि इस आसन में सिकुड़ती है, वापस आने पर खुल जाती है। इस तरह वे आंतरिक लाभ से लाभान्वित होती है।
  • मेरुदंड पर खिंचाव पड़ने से रीढ़ से निकलने वाली नाड़ियां व मांसपेशियां इस प्रकार प्रभावित होती है की शरीर की थकान मिटती है। शरीर मे हल्कापन आता है तथा अधिक चैतन्यता बनी रहती है। आप इसमें अपने आपको अधिक लचीला तथा energetic महसूस करेंगे।
  • फेफड़ों पर आंतरिक दबाव पड़ने से अधिक से अधिक carbon dioxide बाहर निकल जाती है। वापसी में शुद्ध वायु भरने से फेफड़ों की कार्य करने की क्षमता बढ़ जाती है। यानी कि पिछले कुछ समय मे आपने जितनी भी हानिकारक और प्रदूषित हवा को श्वास के माध्यम से अपने शरीर मे ग्रहण किया था हलासन करने के पश्चात आप उस हानिकारक वायु की जगह शुद्ध वायु को ग्रहण कर सकते हैं।
  • हलासन की पूर्ण स्थिति में रक्त का प्रवाह कोरोनरी धमनी ( coronary ) की ओर रहता है जिससे हृदय का पोषण होता है। हृदय के आकार में अनावश्यक बढ़ोतरी नही होती। हम जानते है कि हृदय ही हमारे शरीर का मुख्य कर्ता धर्ता है। इसलिए इसका स्वस्थ होना सबसे अधिक जरूरी होता है। आज के समय मे भी सबसे ज्यादा लोग दिल की बीमारी से ही परेशान है इसलिए इसलिए जरूरत है कि ऐसे ही आसनों को अपने जीवन के अपनाएं और दिल के सभी रोगों से रोग मुक्त बने रहें।
  • हलासन से रक्त चेहरे की ओर बहने से चेहरे की कांति बढ़ती है। कंठ ओर दबाव पड़ने से स्वरतंत्री स्वस्थ बनती है।
  • हथेली एवं भुजाओं पर पड़ने वाला दबाव , हाथों के कंपन को दूर करता है। कंधें बलिष्ठ होतें है। हलासन ऐसा आसन है जिससे शरीर का आंतरिक तंत्र (internal system) तो ठीक रहता ही है साथ में यह आसन शरीर के बाह्य तंत्र (external system) को भी मजबूत बनाती है। अक्सर भारी सामानो को थोड़ी सी ही देर उठाने में हमारे कंधें दर्द होने लगते है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम ऐसे कार्य करने के आदि नही होते । हलासन जैसे आसन करने से हमारे कंधे मजबूत बने रहते है।
  • हलासन से उदार के सभी अंग अंदर की ओर मुड़ने से अधिक पुष्ट होते हैं। पैंक्रियास (pancreas) प्रभावित होने से मधुमेह (diabetes) ठीक होता है। गैस , कब्ज़ आदि भी ठीक होते हैं। चूंकि यह आसन ऐसा है कि जिसमे हमारे शरीर के सभी अंग प्रभावित होते है इसलिए इसके बहुत सारे लाभ हैं । आसान शब्दों में कहें तो आसन उदर की भी कसरत कर कर उसे ह्रष्टपुष्ट बनाने में सक्षम है।
  • हलासन से पंजों से लेकर नितंबों तक की समस्त मांसपेशियां पुष्ट होती है।
  • इस हलासन का सबसे महत्वपूर्ण लाभ है कि इससे यह आसन मोटापा कम करने में भी  बहुत उपयोगी है। मोटापा तो आजकल के मशीनी युग का सबसे बड़ा कांटा है। भारत ही नही बल्कि बाहर के देशों के शारीरिक परिश्रम की कमी के बजह से आज मोटापा ने लगभग हर घर मे अपने पैर पसार रखे है । तो इस हलासन को करें और मोटापा से जल्द से जल्द छूटकर पाएं ।

हलासन विधि

पीठ के बल आसन पर लेट जाएं । टांगे सीधी फैलाते हुए एड़ी व पंजे मिला लें । पंजों को आगे की ओर ताने । दोनों हाथों की हथेलियाँ शरीर के पास रखें। हथेलियों का रुख पृथ्वी की ओर हो। शरीर में पूरा खिंचाव रहे। श्वास भरते हुए बहुत धीरे धीरे पैरों को ऊपर उठाएं। श्वास बाहर निकालते हुए तथा हथेलियों पर दबाव देते हुए पंजों को सिर की ओर ले आएं। धीरे धीरे पंजों को पृथ्वी से लगा दें । इस स्थिति में कमर पृथ्वी से ऊपर उठ जाएगी। यथाशक्ति पंजों को और आगे लाने का प्रयास करें । थोडी कंठकूप से लगाएं । दोनों हाथ पृथ्वी से चिपके रहेंगे तथा उन्हें निकट से निकटतर लाएं तथा अंगुलियां अंगूठे मिलाकर रखें । श्वास सामान्य  बनाये रखें।

वापस आने में बहुत सतर्कता बरतें । धीरे धीरे हथेलियों पर शरीर का भार संतुलित करते हुए रीढ़ की एक एक गोटी को धरती से लगाएं । रीढ़ को जितना धीरे धीरे लाएंगे , उतनी ही लचक रीढ़ में आएगी। पूरी कमर जब पृथ्वी पर आ जाये तो दोनों पैरों को मंद गति से पृथ्वी  की ओर लाएं  तथा एड़ियों को कोमलता से पृथ्वी पर रख दें । वापस आने  पर शरीर को ढीला छोड़ दें और विश्राम करें ।

ध्यान का केंद्र – विशुद्धि चक्र

नोट – यदि हलासन से साधना को समाप्त करना हो तो इसके बाद मत्स्यासन का अभ्यास उपयोगी है। मत्स्यासन के बारे अधिक जानकारी के लिए आप आगे दिए गए लिंक पर जा सकते है  । { बीमारियों को आपके पास न आने दे – मत्स्यासन }

अगर आपको हमारा यह लेख पसंद आया हो या आपका कोई महत्वपूर्ण सुझाव हो तो हमे कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें । योग करते रहें , खुश रहें , स्वस्थ रहें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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