बिना मेहनत के पाइये मोटापे से छुटकारा -सूर्य मुद्रा

क्या है मोटापा

मोटापा आरामपरस्त जिंदगी की देन है। आज के जीवन शैली में मोटापा बड़ी ही तेज़ी से अपने पाँव पसार रहा है। आधुनिकता की इस आंधी ने जहाँ एक ओर विज्ञान जगत की ऊंचाइयों को छुआ है वहीं दूसरी और इसका शरीर पर बड़ा ही हानिकारक प्रभाव भी पड़ा है। इसका सबसे बड़ा उदहारण मोटापा है। बड़े ही नही बच्चे भी अब मोटापा के शिकार बन रहे है। पुरे विश्व में 40% लोग मोटापे से परेशान हैं। महामारी की तरह ये रोग फ़ैल रहा है।

 मोटापे के कुप्रभाव

रक्त कम बनना , चर्बी का अधिक जमा होने , शरीर में लचक नहीं रहना, धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमा होने से रक्त सञ्चालन में बाधा , श्वास जल्दी जल्दी चलना , फेफड़ों का पूरी तरह सक्रिय न होना, रक्त की शुद्धि न होना, नाड़ी संस्थान का ठीक से कार्य न करना, बौद्धिक विकास में बाधा।

मोटापा घटाने का एक अचूक उपाय : सूर्य मुद्रा

सूर्य ऊर्जा का स्त्रोत है। सूर्य का तेज गुण सभी जीवों में समाया हुआ है। आयुर्वेद के अनुसार सूर्य मुद्रा से ऊर्जा का आकर्षण होता है। उससे व्यक्ति में ऊर्जा प्रवाहित होती है तथा व्यक्ति ऊर्जावान बनता है। ब्रह्माण्ड ऊर्जामय है। ऊर्जा की कमी शरीर में  होते ही व्यक्ति  सुस्त पड़ने लगता है तथा इसी ऊर्जा के बिना प्राणी सक्रिय भी नही रह सकता । शरीर  में ऊर्जा की कमी होते ही व्यक्ति स्थूल दिखाई देकर भी अपने आप में हीनता का अनुभव करता है। सूर्य स्वर (दाएँ स्वर) के साथ सूर्य मुद्रा बनाने से शक्ति को शीघ्रता से ग्रहण किया जा सकता है।

विधि

अनामिका को अंगूठे की जड़ में लगा कर अंगूठे से दबाने से सूर्य मुद्रा बनती है। अनामिका और अंगूठा दोनों के संयोग से विशेष विद्युत बहने लगती है तथा व्यक्ति के शरीर से सुस्ती दूर हो नयी ऊर्जा का प्रवाह  होता है।

समय

सूर्य मुद्रा का प्रयोग कम से कम आठ मिनट किया जा सकता है। अधिक समय करने से उष्णता बढ़ जाती है। सर्दी के मौसम में 24 मिनट तक की जा सकती है चूँकि सर्दी में सूर्य से प्राप्त ऊर्जा पर्याप्त नही हो पाती है तथा मौसम में भी नमी होती है जिससे हमारे शरीर को ज्यादा ऊर्जा के आवश्यकता पड़ती  है  परंतु गर्मी के मौसम में सूर्य मुद्रा का प्रयोग एक साथ अधिक समय तक नही करना चाहिए क्योकि जहाँ एक ओर ऐसे मौसम में ज्यादा धूप होती है वहीँ दूसरी और मौसम भी रुक्ष होता है ।

परिणाम

  1. शक्ति का विकास होता है।
  2. ऊर्जा एवं उष्णता पूरे शरीर में फैलती है।
  3. शरीर का संतुलन बनता है।
  4. वजन घटता है ।
  5. तनाव में कमी होती है।
  6. मोटापे में कमी होती है।

प्रभाव

अंगूठा अग्नि तत्व का तथा अनामिका जल तत्व का विकिरण करते हैं। ऊर्जा से जल प्रभावित होता है। अग्नि तत्व को जल तत्व आत्मसात कर लेता है। ललाट पर स्थित ज्योति केंद्र पर तिलक अनामिका एवं अंगूठे से किया जाता है। अनामिका एवं अंगूठे की ऊर्जा से ज्योति केंद्र पर शक्ति का प्रवाह  सक्रिय हो जाता है। इससे अध्यात्म भाव विकसित होता है।

विशेष

एक्युप्रेशर के अनुसार अंगूठे के मूल में थॉयरायड के सांकेतिक बिंदु है । थॉयरायड शरीर के आकार व प्रकार को संतुलित बनाता है। थॉयरायड के बिंदुओं पर दबाव से उसके स्रावों का संतुलन होता गई।

सावधानियां –  दुर्बल शरीर वाले इस मुद्रा को न करें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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