बच्चों का सबसे प्रिय योगासन – शीर्षासन (Shirshasana) ,जाने क्या है इसके लाभ

सिर के बल समूचे शरीर को स्थिर करने के कारण ही इसे शीर्षासन नाम दिया गया है। हमारे सिर के तीन प्रमुख भाग है।

  1. माथे के निकट का भाग
  2. माथे का मध्य भाग
  3. चोटी के पास का भाग

इसमें माथे के निकट का ही भाग पृथ्वी पर लगाया जाता है। अन्य दो भाग लगाने से हानि की सम्भावना रहती है । यह सत्य है कि शीर्षासन के अधिकांश लाभ तो सर्वांगासन से ही मिल जाते हैं, परंतु यह भी उतना ही सत्य है कि इसकी सही विधि तथा संयम नियमों का पालन न करने से यह हानिकारक भी बन सकता है। इसलिए कुछ आवश्यक निर्देश इस विषय में दिए जा रहे है । इन्हीं मुख्य बातों के कारण इस आसन का अभ्यास न करने ला परामर्श गृहस्थियों को दिया जा रहा है ।

  1. पेट बिलकुल साफ़ हो अर्थात कब्ज बिलकुल न हो ।
  2. ब्रह्मचर्य का दृढ़ता से पालन करें। आत्म संयम को जीवन में प्रमुख स्थान दे।

इनके पालन न करने से  शीर्षासन के अभ्यासियों में प्रतिकूल परिणाम देखे गए है। जैसे ब्रेनहेमरेज (मस्तिष्क की नस फटना)  तथा नेत्र की ज्योति का चले जाना । अतः साधारण गृहस्थियों को शीर्षासन को नित्य अभ्यास की साधना में शामिल न करने की सलाह दी जा रही है।

शीर्षासन विधि

अपने आसन पर पंजों व घुटनो के बल बैठें। दोनों हाथों की अंगुलियों को परस्पर गूँथ का आसन आसन पर आगे की ओर रख दें तथा कोहनियां भी टिका दें । हथेलियों में सर को इस प्रकार रखें कि सर का माथे के निकट का भाग पृथ्वी पर लग जाये। फोनों हथेलियां सर के पिछले भाग का सहारा बनें। पंजों को संतुलित करके धीरे धीरे ऊपर उठाएं। । पंजो व मुड़े हुए घुटनी को सीधा  कर दें । कमर सीधी करें । धीरे धीरे इस समय को बढ़ाएं।

वापस आने के लिए पहले घुटनों को धीरे से मोड़े। उन्हें आगे की ओर लाएं। धीरे से पंजों को पृथ्वी पर टिका दें । कुछ समय रुक कर उठें। सीधे खड़े रहकर फिर ताड़ासन करें। ताड़ासन के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएँ ( कद बढ़ाने का राम बाण उपाय – ताड़ासन )  बाद में शवासन करना भी आवश्यक है।

ध्यान का केंद्र – सहस्रार चक्र (ध्यान केंद्र बिंदु के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएँ ) ( योग करते समय कहाँ रहे हमारा ध्यान केंद्र बिंदु (Focus Centre Point) or चक्र? ).

शीर्षासन के लिए ध्यान देने योग्य बातें

  1. सर का माथे के पास का भाग ही पृथ्वी पर लगाएं।
  2. पूर्ण स्थिति में पहुँचने पर शरीर में कंपन न हो।
  3. झटका लगकर गिरने की स्थिति से सदैव बचें ।
  4. आंखें कोमलता से बंद रखें ।
  5. संपूर्ण क्रिया में धीमी गति व संतुलन को अपनाएं।

अक्सर देखा गया है कि शीर्षासन कई बार लोग शौक के लिए भी करते हैं लेकिन यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि यह आसन देखने में जितना अच्छा है अगर इसको ठीक तरीके से या सही समय पर नहीं किया जायेगा तो इसके अनको दुष्परिणाम भी है। इसलिए इस आसन को करते वक्त इसके नियमो का खास ध्यान रखें । गरुणासन भी इसी प्रकार का लाभदायक आसान है । गरुणासन के बारे में अधिक जानकारी के लिए दिए गए लिंक पर जाये। ( जोड़ो के अनेक रोगों का एक उपाय : गरुड़ासन (Garudasana) ) अगर आपको हमारा ये लेख पसंद आया तो इसे लाइक करना न भूलें । साथ ही अपने महत्वपूर्ण सुझाव हमे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे ।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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