योग की दुनिया मे सबसे बड़ी जानकारी, कैसी बीमारी में कौन सा आसन करे ?

आज हम आप लोगों के लिए बेहद खास जानकारी लेकर आएं हैं। आप के मन की सभी शंका, ये लेख पढ़ने के बाद बिल्कुल खत्म हो जाएगी। योगासनों का निर्माण हमारे ऋषि मुनियों ने केवल रोग दूर करने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को शुद्ध एवं स्वच्छ रखने के लिए किया था क्योंकि अस्वस्थ शरीर से न तो हम दुनिया का काम चला सकते हैं और ना परमार्थ की साधना । योग का उद्देश्य आत्मानुभूति है। अतः आसनों का उपयोग शरीर को स्वस्थ रखने और रोगों को दूर करने के लिए किया जा सकता है। योगासनों में इसकी क्षमता है।

आज कल जितनी छोटी छोटी बिमारियों को हम बड़ा कर देतें हैं, उन सबका उपचार हमारे योग में है या हम ये भी कह सकते है कि अगर नियमित रूप से योग करें तो ये रोग शरीर में उत्पन ही न हो, तो दवाइयाँ खा के अपने शरीर को उनका आदि बनने की जरूरत ही न हो। नीचे दिए गए लेख को पढ़ें और अपने शरीर को रोगमुक्त करे।

  1. अजीर्ण – ( बदहजमी व गैस ) – त्रिकोण, वज्रासन, उष्ट्रासन,सर्पासन, भुजंगासन, पादोत्तानासन, पवनमुक्तासन।
  2. बवासीर – त्रिकोण आसन , नावासन, जानुशिर आसन, कोनासन, सुप्तवज्रासन, भुजंगासन, शलभासन, धनुरासन, मकरासन, पादोत्तानासन, सर्वांगासन, मत्स्यासन, मूलबन्द आसन, एनिमा।
  3. अल्सर – वज्रासन, शशांकासन, पवनमुक्तासन, शवासन – योगनिद्रा, प्राणायाम, तनाव दूर करना।
  4. कमरदर्द – अश्वत्थासन, भुजंगासन, शलभासन, कोनासन, उष्ट्रासन, मकरासन, शवासन।
  5. धरण – पैर का अंगूठे पकड़ कर खींचे, हस्तपादोत्तनासन, पादोत्तानासन, धनुरासन
  6. खांसी – जनिशिरासन, कोनासन, भुजंग आसन, शलभासन, ताड़ासन, भस्त्रिका व कपालभाति।
  7. गुर्दा – ताड़ासन, भुजंगासन, योग मुद्रा, गोमुखासन, शशांकासन, पदोत्तन आसन।
  8. यकृत – कमर चक्रासन, योग मुद्रा, जानुशिर आसन, उष्ट्रासन, पादोत्तानासन, हलासन, मत्स्य, अग्निसार क्रिया, कुंजल।
  9. मोटापा – सूर्य नमस्कार, कमर चक्रासन, जानुशिरासन, कोनासन, नावासन, सर्पासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, वज्रासन, पादोत्तानासन, सर्वांगासन, उडिड्यान बंध, भस्त्रिका, नाड़ी शोधन।
  10. मधुमेह – सूर्य नमस्कार, जानुशिरासन,कोनासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, सुप्तवज्रासन, शशांकासन, भुजंगासन, शलभ आसन, हलासन, सर्वांगासन, मत्स्यासन, उडिड्यान बंध, शंख प्रक्षालन।
  11. दमा – सूर्य नमस्कार, गोमुखासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, सुप्तवज्रासन, कोनासन, भुजंगासन, शलभ आसन, पवनमुक्तासन श्रृंखला के आसन, उज्जायी व नदी शोधन प्राणायाम बिना साँस रोके, धीरे धीरे भस्त्रिका, नेति, कुंजल।
  12. गठिया वात – ताड़ासन, नावासन, कोनासन,भुजंगासन, शलभ आसन, पदोत्तन आसन, पवनमुक्तासन, हलासन, मत्स्यासन,गोमुखासन।
  13. हाई ब्लडप्रेशर – ताड़ासन, वज्रासन, सुप्तवज्रासन, शशांकासन, शिथिलासन (दाईं ओर) ,पवनमुक्तासन, मत्स्यासन,चन्द्रभेदी प्राणायाम, शीतली प्राणायाम, ध्यान।
  14. निम्न रक्तचाप – पद्मासन, ताड़ासन, वज्रासन, शिथिलासन बायीं ओर, पादोत्तानासन, मकर आसन, सूर्यभेदी व कपालभाति प्राणायाम बिना श्वास रोके।
  15. गले के रोग – ताड़ासन, कोनासन, उष्ट्रासन, सुप्तवज्रासन, भुजंगासन, शलभ आसन, सर्वांगासन, मत्स्यासन, सिंहासन।
  16. हर्निया – गरुणासन, सुप्तवज्रासन, हस्तपादोत्तनासन, सर्वांगासन, मत्स्यासन। नोट – पेट के बल कोई आसन न करें।
  17. अनिद्रा – सूर्यनमस्कार, जानुशिरासन, कोनासन, शिथिलासन, सर्वांगासन, मत्स्य आसन, शवासन, भ्रामरी प्राणायाम, योगनिद्रा, ध्यान।
  18. मासिक धर्म – त्रिकोण आसन, ताड़ासन, जनिशिरासन, सुप्तवज्रासन, भुजंगासन, शलभासन, पादोत्तानासन, मकरासन, शवासन।
  19. शायटिका – पद्मासन, नावासन, जनिशिरासन , कोनासन, पादोत्तानासन,मकरासन, शवासन।
  20. मानसिक उदासी – त्रिकोणासन, ताड़ासन, जनिशिरासन, भुजंगासन, पादोत्तानासन, योगनिद्रा, भ्रामरी प्राणायाम।
  21. स्नायु शिथिलासन – पद्मासन, नाव आसन, गरुणासन, गर्भासन, मकरासन, पादोत्तानासन, सर्वांगासन, मत्स्यासन
  22. सिरदर्द – त्रिकोणासन, नावासन, जानुशिरासन, कोनासन, भुजंगासन, शलभासन, पादोत्तानासन, मकरासन, कपालभाति प्राणायाम।
  23. नेत्रों के लिए – वज्रासन, धनुरासन, सर्पासन, हलासन, सर्वांगासन, मत्स्यासन, नेत्र सुरक्षा क्रियाएं।
  24. श्वेत प्रदर – त्रिकोंनासन, जनिशिरासन, कोनासन, सुप्तवज्रासन, भुजंगासन, शलभासन, पादोत्तानासन, मकरासन, हलासन, शवासन।
  25. आंत्रपुच्छ प्रदाह – त्रिकोणासन, जनिशिरासन, कोनासन, मत्स्येन्द्रासन, मत्स्यान आसन, पादोत्तानासन,मकरासन, एनिमा।
  26. पथरी – त्रिकोण आसन, जानुशिरासन, कोनासन, योगमुद्रा, आकर्णधनुरासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, भुजंगासन, शलभ आसन, पादोत्तानासन, मकर आसन।
  27. गुर्दे की पथरी – त्रिकोणासन, सूर्यनमस्कार, योगमुद्रा, जानुशिरासन, कोनासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, पादोत्तानासन, मकर आसन।
  28. टॉन्सिल – भुजंगासन,त्रिकोणासन, मकर आसन, सर्वांगासन, मत्स्यासन, सिहांसन।
  29. खून की कमी – जानुशिरासन, कोनासन, योगमुद्रा, अर्धमतसेन्द्रासन, भुजंगासन, सर्वांगासन, मत्स्यासन।
  30. त्वचा रोग – त्रिकोणासन, जानुशिरासन, कोनासन, भुजंगासन, सर्वांगासन, मत्स्यासन, शवासन, कुंजल, शितिली प्राणायाम।
  31. अम्लपित्त – कुंजल, त्रिकोणासन, पादांगुष्ठासन, जानुशिरासन, कोनासन, योगमुद्रा, अर्धमतसेन्द्रासन, भुजंगासन, धनुरासन, पादोत्तानासन, पवनमुक्तासन, अग्निसार प्राणायाम।
  32. कब्ज – शंखप्रक्षालन के पांच आसन, गणेश क्रिया, एनिमा, सर्पासन, भुजंगासन, शलभासन, धनुरासन, पादोत्तानासन, मकरासन, अग्निसार क्रिया।
  33. दस्त – जानुशिरासन, हस्तपादोत्तनासन, विपरीतकर्णी, शवासन, बिना कुम्भक के नाड़ी शोधन प्राणायाम, उड्डियान बंध।
  34. सन्धिवात – त्रिकोणासन, ताड़ासन ( लेटकर) , अर्धचंद्रासन, नावासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, उष्ट्रासन, शलभासन, धनुरासन, पादोत्तानासन, सूर्यभेदी प्राणायाम, भस्त्रिका प्राणायाम, एनिमा, कुंजल।
  35. मुख से दुर्गंध – त्रिकोणासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, शीतकारी प्राणायाम, भस्त्रिका प्राणायाम, कब्ज दूर करने वाले उपचार।
  36. स्मरण शक्ति बढ़ाना – नौकासन, शलभासन, जानुशिरासन, कोनासन, विपरीतकर्णी, सर्वांगासन, शवासन, त्राटक, गहरे लंबे श्वांस, कपालभाति, भस्त्रिका, नाड़ी शोधन प्राणायाम, ध्यान।
  37. पागलपन ( उन्माद/ इंसेनिटी) – कुंजल, एनिमा, त्रिकोणासन, योगमुद्रा, नावासन, कम्रचक्रासन, भुजंगासन, शलभासन, धनुरासन, पादोत्तानासन, मकरासन, सर्वांगासन, विपरीतकर्णी, शवासन, शितिली प्राणायाम, शीतकारी, चन्द्रभेदी प्राणायाम, कपालभाति
  38. हृदयविकार – सादा एवं कम मात्रा में भोजन , त्रिकोणासन, शवासन, गोमुखासन, भुजंगासन, शलभासन , पादोत्तानासन,मकरासन। नोट – आसन करते समय श्वास न रोकें। प्राणायाम में भी श्वास न रोकें। धीरे व गहरा श्वास लेने का प्रयास करें। अज्जायी प्राणायाम, अनुलोम विलोम प्राणायाम, ध्यान, योगनिद्रा का अभ्यास उपयोगी है।
  39. नपुंसकता – त्रिकोणासन, नावासन, जानुशिरासन, कोनासन , अर्धमत्स्येन्द्रासन, वज्रासन, सुप्तवज्रासन, गोरक्षासन,उष्ट्रासन, शलभासन, पादोत्तानासन, मकरासन, सर्वांगासन, मत्स्यासन, मूलबन्ध, उड्डियान बन्ध, नदी शोधन प्राणायाम।

ऊपर दिए गए अनेकों बीमारियों का इलाज आप दिए गए योगासनों द्वारा कर सकते हैं। हमारे योग में सभी बिमारियों का उपचार है। योग सिर्फ बीमार शरीर को ठीक करने का साधन ही नहीं बल्कि बीमार मन को भी ठीक करता है और साथ ही जीवन को सरल तथा पीड़ामुक्त जीने में सहायता करता है। इन सभी आसनों की विधिवत जानकारी आपको eyogguroo की इस साइट पर उपलब्ध है। अपने शरीर की आंतरिक क्रियाओं के लिए आप त्रिदोष के बारे में जान सकते हैं। त्रिदोष के बारे में अधिक जानकारी के लिए आगे दिए गए लिंक पर जाएं। ( त्रिदोषशरीर में बिमारियों का कारण : त्रिदोष ) । आशा करतें है कि आपको हमारा यह लेख पसंद आया हो। अपने सुझाव हमें कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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