योग में विशिष्ट स्थान रखने वाला आसान : पश्चिमोत्तान आसन

शरीर के स्वस्थ होने से कार्य क्षमता बढ़ती है तथा जो भी कार्य किया जाता है, उसे मन लगाकर तथा निष्ठापूर्वक किया जाता है। ध्यान – पूर्वक कार्य करने वाला व्यक्ति लापरवाही से काम करने वाले से बहुत अच्छा होता है। उसे सभी पसन्द करते हैं। समय का सदुपयोग करना उसे आ जाता है। वह हर कार्य को तनाव- रहित होकर प्रसन्नतापूर्वक करता है, इसलिए उसे थकान नहीं होती। उसके शरीर में कोषाणुयों के बनने की अधिक तथा नष्ट होने की क्रिया कम हो जाती है। यही रहस्य है उसके आयुपर्यन्त युवा बने रहने का। ये है योग का एक और महत्वपूर्ण लाभ। आज हम आपको पश्चिमोत्तान आसन के बारे में बताएंगे।

पश्चिम का अर्थ है पीठ। अतः पीठ को तानने के कारण इस आसन को पश्चिमोत्तान आसन कहते हैं। पश्चिमोत्तान आसन एक प्रभावशाली आसन है। कुछ विशिष्ट और महत्वपूर्ण आसनों में पश्चिमोत्तान आसन का स्थान अग्रणी है। विशेष रूप से पेट और रीढ़ दोनों ही पश्चिमोत्तान आसन से प्रभावित होती है।

  • इसके अभ्यास से रीढ़ लचीली, शरीर सुगठित तथा कमर के निचले भाग का कड़ापन दूर होता है।
  • घुटना, शायटिका, स्वप्नदोष, बवासीर, नजला-जुकाम आदि रोग दूर होते हैं।
  • प्राण – अपान के मिलने से सुषुम्ना – द्वार खुलने में सहायता मिलती है।
  • पेट के दबने से ग्रन्थियों के स्रावों में सन्तुलन होता है।

पश्चिमोत्तान आसन विधि

आसन पर बैठें। दोनों पैरों की एड़ी व पंजें मिलाएँ, पंजे तानें, हथेलियाँ घुटनों पर रखें। श्वास भरते हुए दोनों हाथों को आकाश की ओर खींचें, पीठ भी तानें। श्वास छोड़ते हुए धीरे धीरे कमर के निचले भाग से आगे की ओर झुकते जाएं। कलाइयों को पंजों से आगे निकालने का प्रयास करें। जिनकी यह स्तिथि बनती है वे हाथों से पैरों के अंगूठे पकड़ लें, इतना खींचे कि कोहनियां पृथ्वी से लग जाएं, माथा घुटनों पर टिक जाये। श्वास को सामान्य कर लें। हाथों और पंजों को आगे की ओर तानें। पीठ पर उतना ही खिंचाव दें। श्वास भरते हुए भुजाएं ऊपर ले जाएं, पीठ तानें, हाथ बराबर से वापस लाएं। दोनों हाथों को कमर के पीछे रख दें। पंजों को दाएं – बाएं हटाकर ढीला कर दें। ध्यान का केंद्र – योग करते समय कहाँ रहे हमारा ध्यान केंद्र बिंदु (Focus Centre Point) or चक्र? ).

  • पश्चिमोत्तान आसन में ध्यान देने योग्य विशेष बात यह है कि घुटने न मुड़े। पीठ व हाथ तने रहें।
  • हृदय रोग में, उच्च रक्तचाप में तथा कमर दर्द में इसे न करें। योग्य शिक्षक की सलाह लें।

योगासन तन तथा मन दोनों को स्फूर्ति प्रदान करता है साथ ही नसों में खिंचाव के कारण नसों में लचीलापन भी बना रहता है। योग करने का सही समय प्रातःकाल है। प्रातःकाल में योग करना सबसे ज्यादा लाभकारी होता है। इसलिए योग करें स्वस्थ रहें।

पश्चिमोत्तान आसन की तरह ही आकर्ण धनुरासन भी शरीर के स्वस्थ्य होने में अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । आकर्ण धनुरासन के बारे में अधिक जानकारी के लिए आगे दिए गए लिंक पर जाएँ । ( गठिया की बीमारी का रामबाण उपाय – आकर्ण धनुरासन ).

अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें और योग को नियमित रूप से अपने जीवन में अपनाएं। अगर आपके पास कोई भी सुझाव हो तो हमे कमेंट सेक्शन में लिखना न भूलें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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