योग (Yoga) शुरू करने से पहले जरूर जाने ये बातें –

1.कान, आँख और छाती (chest) में पीड़ा हो , उच्च रक्तचाप हो तो सर्वांगासन न करें।

2.यदि मेदा ख़राब हो, तिल्ली (Spleen) बढ़ी हुई हो तो भुजंग , शलभ व धनुरासन न करें।

3.कब्ज हो तो योग मुद्रा (Yoga Mudra) तथा पश्चिमोत्तान अधिक देर तक न करें।

4.दिल के दौरे के एक -डेढ़ महीने बाद आसन शुरू करें परंतु पहले शवासन से शुरू करके हल्के – फुल्के आसन बाद में करें। श्वास न रोकें।

5.रक्तचाप (Blood Pressure) 150 से ज्यादा या 100 से कम हो तो कोई भी कठिन आसन न करें।

6.प्रत्येक आसन के बाद श्वास शांत होने पर कुछ देर शांत बैठें। सूर्यनमस्कार के अंत में शवासन अवश्य करें।

7.योगासन (Yoga) अपने शरीर की क्षमता के अनुसार करें। शरीर के साथ अन्याय न करें।

8.यदि योगासन (Yoga) का अभ्यास छूट गया हो तो अभ्यास फिर से शुरू करने के लिए धीरे धीरे अभ्यास बढ़ाएं।

9.बीमारी के बाद विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही योगासन शुरू करें।

10.अभ्यास खाली पेट करे ।

11.आसन का स्थान स्वच्छ एवं समतल हो। नीचे दरी – कंबल – चादर आदि हो । तेज हवा लगे ऐसा स्थान भी न हो। खुला पार्क सबसे अच्छा स्थान होगा। घर पर आसन पूरी तन्मयता व नियमितता से नहीं हो पाता।

12.आसनों के आधा घंटा बाद हल्का आहार लें। आसनों के पंद्रह मिनट बाद एक गिलास पानी पी सकते है।

13.प्रातः और सायं दोनों समय आसन किये जा सकते हैं। स्नान करने के बाद तो आसन करने का आनन्द ही कुछ और है ।

14.प्रारम्भ में सरल और आसान आसन करें।

15.शीघ्र सफलता के लिए योगासनों में नियमितता , श्रद्धा, सही विधि से दीर्घकालीन अभ्यास की आवश्यकता है।

16.यौगिक अभ्यास का लाभ तब तक नही मिलेगा जब तक भोजन सादा , ताजा, सुपाच्य, सात्विक प्रकृति के अनुकूल तथा चबा चबाकर न खाया जाए। सलाद , फल , हरी सब्जियों का प्रयोग भोजन में अधिक हो।

17.योगासन (Yoga) शौचादि से निपट कर शुद्धिक्रियाओं को करने के बाद करें।

18.महिलाएं मासिक धर्म की स्थिति में केवल शवासन करें, अन्य कोई आसन न करें।

19.योगासन (Yoga) मौन भाव से तथा शांत मन से करना चाहिये।

20.आसन की पूर्ण स्तिथि में रुकना चाहिए। धीरे धीरे उसका समय बढ़ाना चाहिये। तनावरहित स्तिथि में रुकने से समग्र लाभ प्राप्त होतें है

21.योगासन (Yoga) एक साधना है। इसको तन्मयता , शांति व धैर्य के साथ करें। जल्दबाजी न करें। झटके भी न लगने दे।

22.मौसम के अनुसार वस्त्र पहने। गर्मी में कम से कम व ढीले तथा सर्दी में केवल उतने ही , जो सर्दी से बचा सकें।

23.आसन के बाद उपासन करना लाभप्रद है।

24.योगासनों (Yoga) के अभ्यास के अंत में कम से कम 3 मिनट का शवासन अवश्य करें। इससे थकान नही रहेगी तनाव भी दूर होगा। दिन में नींद नही आएगी।

25.देर में सोने से सवेरे उठने में कठिनाई होगी। अतः जल्दी सोना आवश्यक है।

योग (Yoga) करना हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है लेकिन उसमें भी सतर्कता बरतना बहुत आवश्यक है । नही तो हो सकता श् योगासन (Yoga) से लाभ की जगह हानि हो जाए। हमें भोजन में भी उसी प्रकार की सतर्कता बरतनी चाहिए। ऐसी जानकारी के लिए आप आगे दिखाये गये लिंक और जा सकते हैं ( आयुर्वेद (Ayurveda) के अनुसार विरूद्ध आहार (against diet) क्या होते है ? और कौन-2 से हैं ? ) साथ ही अपने महत्वपूर्ण सुझाव हमे कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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