शरीर के तीनों दोष ( वात-पित्त-कफ) को दूर भगाए – मयूरासन

स्वस्थ और सुखी जीवन की इच्छा सभी को होती है परंतु इसे पाने के लिए हम परिश्रमहीन उपाय ढूंढते हैं या फिर ईश्वर से मात्र प्रार्थना करते हैं। आज मानव आधुनिकता की होड़ में अपने स्वस्थ को भूल बैठा है। हम अच्छे आचरण और सद्भाव की संस्कृति को कहीं भूलते जा रहे हैं। हमारी भारतीय संस्कृति महान है जिसके अंतर्गत ‘सर्वे भन्तु सुखिनः ‘ जैसी कल्याणकारी सूक्ति सन्निहित है जिसका अर्थ है, सभी सुखी हों। यह भारतीय संस्कृति में मानवतावादी दृष्टिकोण है।

मनुष्य जीवन का उच्चतम उद्देश्य सुख, शांति और आनन्द की प्राप्ति है। यह प्राप्ति जीवन के सभी पक्षों में विकास से ही सम्भव है। मनुष्य जीवन के विभिन्न पक्ष हैं- शारीरिक पक्ष, मानसिक पक्ष, सहजात्मक पक्ष, नैतिक पक्ष और आध्यात्मिक पक्ष। सभी पक्षों में विकास करना ही सर्वमुखी विकास कहलाता है।

अब प्रशन पैदा होता है कि वह कौन सी विधि है जिसका अभ्यास करने से सर्वमुखी विकास सम्भव है। योगियों, मनीषियों, महापुरुषों ने इस पर गहराई से विचार किया और अंत में इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि योग मार्ग ही इस उद्देश्य की प्राप्ति करा सकता है।

मयूर मोर को कहते हैं। मयूर के समान शरीर की स्तिथि होने से इसे मयूरासन कहते हैं। सांप मोर का भोजन है। उसके विष का मोर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। इसी तरह इस आसन के अभ्यासी की पाचन- शक्ति इतनी तेज होती कि विषाक्त भोजन भी पच जाता है। मयूरासन करने का फायदा ही यही है की मयूरासन को लगातार करने  से आपका पाचन शक्ति बहुत तेज हो जाती है। जिससे आपको कुछ खाने से पहले आपको ये सोचने की जरूरत नहीं की आपको ये भोजन पचेगा या नहीं आप बेझिझक कुछ भी अपनव पसन्द का भोजन का लुफ्त उठा सकते हैं।

मयूरासन के लाभ-

  • मयूरासन से पाचन अंग विशेष रूप से प्रभावित होते हैं। अमाशय, आंतें आदि सुदृढ़ व सक्रिय होती हैं। भूख बढ़ती है। पेट का मोटापा घटता है।
  • मयूरासन से कलाइयों, भुजाओं, फेफड़ो, पसलियों एवं हृदय को बल मिलता है।
  • मयूरासन से वात-पित्त-कफ के दोष दूर होते हैं। वात पित्त कफ आदि के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमारे आगे दिए लिंक पर जरूर जाएं ( शरीर में बिमारियों का कारण : त्रिदोष )
  • पेट के कीड़े मयूरासन के अभ्यास से नष्ट होते हैं।
  • मयूरासन से रक्त की शुद्धि होती है। रक्त-संचार अच्छा बनता है, जिससे शरीर में तेज व कान्ति और स्फूर्ति इंजेक्शन के प्रभाव की भांति आती है।

मयूरासन विधि-

दोनों हथेलियों को आसन पर इस प्रकार टिकाएं की अँगुलियों का रुख पैरों की ओर हो। घुटनो के बल शरीर को आगे झुकाते हुए, दोनों कोहनियों को श्वास भरकर नाभि पर स्तिथ कर दें। माथे को पृथ्वी से लगा दें। धीरे- धीरे सन्तुलन बनाते हुए गर्दन व् पीछे से तने हुए पैरों को बड़ी सावधानी से उठायें, जिससे की सारा भार नाभि पर आ जाये। इस स्तिथि में हल्का हल्का श्वास ले सकते हैं। धीरे धीरे वापस आएं और शिथिलासन में लेट जाएं।

ध्यान का केंद्र – मणिपुर चक्र

  • इस आसन में ध्यान देने योग्य विशेष बात यह है कि कलाइयों पर जब पुरे शरीर को उठाएं तो सावधानी पूर्वक सन्तुलन बनाएं।
  • महिलाओं के लिए यह आसन वर्जित है।

चक्रों पर ध्यान करते हुए योगासनों का अभ्यास साधक की साधना में चार चाँद लगा देता है , क्योंकि – हमारा मन सारे संसार की वस्तुओं एवं घटनाओं से हट कर उस अंतरंग शक्ति पर ठहरने का अभ्यासी हो जाए। मन का यह अभ्यास में की बाहरी यात्रा करने या भागने की चंचल आदत को आंतरिक एक बिंदु पर स्थित होकर बैठने से बदलेगा ।

मणिपुर चक्र का स्थान

मणिपुर चक्र नाभि के पीछे रीढ़ पर स्तिथ है। ध्यान चक्र के बारे में अधिक जानकारी आपको हमारा eyogguroo सारी जानकारी उपलब्ध कराता है। इसकी अधिक जानकारी के लिए आपको आगे दिए गए लिंक पर जाना होगा । ( योग करते समय कहाँ रहे हमारा ध्यान केंद्र बिंदु (Focus Centre Point) or चक्र? )

यह प्राण का भंडार होता है। साथ ही यह अग्नि का प्रतीक भी है।

मणिपुर चक्र पर ध्यान लगाने से शरीर के भाग जिसमें प्राण संचार करता है वह है नाभि से हृदय तक भोजन का रस निकलना तथा शरीर में उसका वितरण करना।

योगाभ्यास से पाचन सुदृढ़ बनता है। अन्तःस्त्रावी ग्रँतियों के स्त्राव सही मात्रा में बनने लगते हैं। कैलोरी को जलाने में योगाभ्यास एक सर्वश्रेष्ठ साधन है। 6 वर्ष की आयु के बाद का बच्चा या युवा यदि प्रतिदिन 60 मिनट योगाभ्यास करता है तो उसके शरीर में मोटापा बढ़ने की संभावना कम होने पगति है। उसकी शारीरिक व मानसिक स्थिति अच्छी बनने लगती है। जो बच्चे या युवा मोटापे से पीड़ित हैं उन्हें योगाभ्यास की सलाह दी जाती है।  जिससे मोटापे को खतना कियाबज सके और साथ ही अन्य बिमारियों तथा बहुत सी परेशानियों को दूर भगा सके । जिसके लिए योगाभ्यास जरुरी है।

जिस तरह योगाभ्यास जरुरी है उसी प्रकार ध्यान भी बहुत जरुरी है। ध्यान के अभ्यास से चयापचय ठीक बनता है, जो की मोटापे को ठीक करने में सहायक है। प्रतिदिन योगाभ्यास और खेल कूद भी जरुरी है। अपने भोजन और शरीर पर ध्यान रखने से सभी बीमारियों से मुक्ति पा सकते हैं।। मयूरासन हमारे शरीर को जहां एक ओर अनेक बीमारियों से बचाता है वहीं दूसरी ओर यह हमारे शरीर को लचीला बनाता है।  मयूरासन की तरह ही और भी बहुत सारे आसन है जो हमारे शरीर में होने वाली कई बीमारियों को होने से पहले ही रोक देता है। इस आसन की तरह ही मत्स्यासन भी बहुत ही स्वास्थवर्धक आसन है । मत्स्यासन के बारे में अधिक जानकारी के लिए आगे दिए गए लिंक पर जाए। ( बीमारियों को आपके पास न आने दे – मत्स्यासन ) । अपने महत्वपूर्ण सुझाव हमे कमेंट बॉक्स में जरूर लिख भेजे ।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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