सभी योग आसनों के सबसे आसान – शवासन

विश्राम में आवश्यक निर्देशों का पालन करना आवश्यक है। जो लोग विश्राम करने नहीं जानते, वे टूटे टूटे से नजर आते हैं। कुछ कर सकने की हिम्मत उनमें नहीं रहती । कई लोग शवासन को मृतासन भी कहते हैं क्योंकि इसमें शरीर शव की तरह निश्चेष्ट रहता है। नस नाड़ियाँ शिथिल रहती है। मृत में तो हड्डी सख्त हो जाती है, परन्तु इसमें ऐसा नहीं होता। अतः यह मृतक सी क्रिया नहीं है, अपितु कल्याणकारी आसन है। इसको बच्चे, बूढ़े, और जवान, रोगी, स्त्री,और बलवान- सभी कर सकते हैं।इतना ही नहीं, मजदूर हो या किसान, छात्र हो या बाबू, वकील हो या व्यापारी या अधिकारी- सभी इससे शरीर को तनाव रहित करके थकान मिटा सकते हैं और नव शक्ति प्राप्त कर सकते हैं।

  • विश्राम के कई आसनों जैसे- बैठकर विश्राम, वज्रासन में विश्राम, शिथिलासन में विश्राम आदि में शवासन सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें देह, प्राण,मन एवं इंद्रियों में नवशक्ति और स्फूर्ति का संचार होता है। इससे अंतरंग व बहिरंग शरीर में तालमेल बैठता है। इस आसन में हमारे तीनों शरीरों का समन्वय हो जाता है।
  • हठ योग प्रदीपिका के अनुसार शवासन की परिभाषा इस प्रकार की है-

उतानं शववद्भूमौ शयनं तच्छवासनम।

शवासन श्रातिहर चित विश्रांतिकारकम ।।

  • अर्थात पीठ के बल धरती पर लेट कर शव के समान सीधा हो जाना ही शवासन है। इससे श्रम या थकावट का शमन होता है। चित्त को विश्राम मिलता है।
  • पूर्ण विश्राम की यह सबसे सुंदर प्रक्रिया है।
  • मांसपेशियों को शवासन तनावरहित करता है। थके हुए भागों में दूसरे अंगों से शक्ति का स्थानांतरण करता है। शरीर के सभी बहरी व आंतरिक अंगों को पूर्णतः तनावरहित एवं शिथिल करता है।
  • मन और शरीर के दोषों को दूर करता है।
  • प्रगाढ़ निद्रा लाने में सहायक है। इसका अभ्यासी कम समय में अपनी नींद पूरी कर लेता है। उसी से वह शरीर में अधिक स्फूर्ति , चेतना व शक्ति का निर्माण कर लेता है।
  • उच्च रक्तचाप का दबाव कम होता है।
  • मन को शांत एवं अंतर्मुखी बनाता है। सदैव इसके अभ्यास से तृप्ति की अनुभूति होती है।
  • शरीर की बाहरी व आंतरिक सुंदरता का निर्माण करता है , जो स्थिरता, ताजगी, शक्ति, सम्पूर्ण, समन्वय, अच्छा स्वास्थ्य, मन व शरीर का तालमेल रखता है। आत्मा के सौंदर्य के आधार पर व्यक्तित्व को भी निखारता है।
  • हृदय रोग , अनिद्रा, स्नायु दौर्बल्यता, मानसिक असन्तुलन, स्मरण शक्ति की कमी, चलते चलते बड़बड़ाना तथा अन्य कई मनोकायिक रोगों का उपचारक है।

भोजन के पश्चात इसका अभ्यास पाचन क्रिया को ठीक करता है।

शवासन विधि

आसन पर पीठ के बल लेट जायें। पैरों में सुविधाजनक फासला रखें। हाथ शरीर से थोड़ा अलग हों। हथेलियाँ आकाश की ओर हों। शरीर सीधा हो, परन्तु ढीला रहे।आँखे कोमलता से बन्द रहें।

शरीर ढीला करने पर पंजो से सिर तक तथा सिर से पंजो तक शरीर का मानसिक अवलोकन करें।

अभ्यास बढ़ने पर नीचे दिया गया अभ्यास जोड़ें – हमारे शरीर में 5 तत्व हैं – पृथ्वी, जल,अग्नि, वायु, व आकाश। हमारे स्थूल शरीर में उनके स्थान इस प्रकार हैं-

  1. पैर के अंगूठे से लेकर घुटने तक – पृथ्वी तत्व।
  2. घुटने से लेकर नाभि तक – जल तत्व।
  3. नाभि से लेकर कंठ तक – अग्नि तत्व।
  4. कंठ से लेकर भ्रूमध्य तक – वायु तत्व।
  5. भ्रूमध्य से लेकर कपाल तक – आकाश तत्व।

पैरों से लेकर कपाल तक तत्व दर्शन करें। आपको तत्व बोध होगा। तत्पश्चात इन तत्वों से परे जो एक परम तत्व है, उसकी अनुभूति होगी। उसी के लिए यह सहयोगी क्रिया है। अंत में दायीं ओर करवट ले कर उठ बैठें। ध्यान केंद्र – सम्पूर्ण शरीर।

  • इसमें ध्यान देने योग्य विशेष बात यह है कि शवासन सब दृष्टि से पूर्ण आसन होने के नाते इसमें स्थूल शरीर की स्थिरता, प्राण व मन का नियंत्रण बना रहना आवश्यक है। अपने शरीर का अवलोकन करते समय में मन को भटकने से बचाना है। अतः धीरे धीरे यह प्रयास करें की मन शरीर के उन अंतरंग अंगों को देखने में इतना रम जाये कि वह बाहर भागना भूल जाये।

नोट

  1. सब आसनों के बाद ही शवासन करने का विधान है।
  2. इसमें सो न जाएं, तभी पूर्ण लाभ मिलेगा।

शवासन सभी आसनों में सबसे आरामदायक और आसान आसन है। इस आसन का मुख्य काम शरीर की सभी धमनियों और और गतिविधियों को संतुलित करने है । जब कड़ी मेहनत के योग तथा आसन करने के बाद शरीर बहुत थक जाता है और हृदय की धड़कने के गति बढ़ जाती है तब उसे समय अवस्था मे लाने के लिए शवासन करने का प्रयोजन है। इसलिए अक्सर से सभी आसन हो जाने के बाद आखिरी में कराया जाता है। शवासन स्वयम मेरे भी सबसे प्रिय आसनों की श्रेणी में शुमार है।

शवासन के जैसे ही मयूरासन भी बहुत रोचक तथा लाभकारी आसान है । मयूरासन के बारे में अधिक जानकारी के लिए आगे दिए गए लिंक पर जाएं । ( शरीर के तीनों दोष ( वात-पित्त-कफ) को दूर भगाए – मयूरासन ) । योग को अपने नियमित दिनचर्या में अपनाये और अपने जीवन को रोग मुक्त और खुशहाल बनाये। योग सिर्फ आपको सिर्फ शारीरक रूप से कुशल नही बनाते बल्कि मानसिक रूप से भी आपको खुशहाल करते है । एक बार नियमित समय पर ठीक प्रकार आसान कर के तो देखें । हमारा दावा है कि श् की आप पहले की दिनों से ज्यादा खुश और एक्टिव रहेंगे । योग को अपने  जीवन मे उतारें और योग के लाभ हानि या किसी भी प्रकार की जानकारी आप eyogguroo से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अगर आपको हमारा यह लेख पसन्द आया हो तो अपने महत्वपूर्ण सुझाव हमे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे । योग करते रहे , स्वस्थ रहें खुश रहें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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