सर्वाइकल जैसी अनेक बीमारियों में लाभदायक – कोणासन

योग से हमारे शरीर में अनुशासन आता है। उत्साह बना रहता है। व्यवहार की शुद्धि के साथ साथ धीरे – धीरे कर्तव्य- अकर्तव्य  बोध आने लगता है। हम फिर राग – द्वेष, सुख- दुख, लाभ – हानि तथा जय- पराजय से ऊपर उठने लगते हैं। ये सब हमारे मन, प्राण, इंद्रियों व् चित्त तक ही हमें प्रभावित करते हैं हम इनके द्रष्टा हैं। यह उत्तम स्तिथि योग से ही प्राप्त होती है।

कोणासन का पूर्ण लाभ उसके उपासन में निहित है। पश्चिमोत्तान में शरीर को आगे की ओर झुकाते हैं और कोणासन में पीछे की ओर। उसमें पेट प्रभावित होता है तो इसमें रीढ़। विपरीत क्रिया होने से अंग पूर्णतः प्रभावित होते हैं।

  • पश्चिमोत्तान आसन में पेट के अंगों का संकोचन होता है तो कोणासन में फैलाव की क्रिया होती है। अतः दोनों क्रियाओं से पूर्णता आती है। इसलिए इस उपासन का महत्व है।
  • पश्चिमोत्तान के सभी लाभ इसमें निहित हैं।
  • पंजों को पृथ्वी पर लगाने से विशेषतः पिण्डलियाँ प्रभावित होती है। उनमें कोई विकार नहीं रहता।
  • नाभि के आस पास जमा हुआ मल उखड़ता है। निष्कासन क्रिया सहज होती है।
  • कोणासन के द्वारा कंधे व कलाइयाँ पुष्ट होती है।
  • सर्वाइकल व स्लिप डिस्क से पीड़ित व्यक्तियों के लिए अत्यंत लाभकारी है।

कोणासन की विधि-

आसन पर बैठें। एड़ी – पंजे मिलाकर पंजे तानें। दोनों हाथों की हथेलियाँ पीछे की ओर इस प्रकार रखें कि अंगुलियाँ, अंगूठा बाहर की ओर रहें तथा मिले रहें, हाथों की दुरी कम कर लें। हतेलियों और पंजों पर पूरा शरीर सन्तुलित करते हुए व श्वास भरते हुए शरीर को अत्यंत धीरे धीरे ऊपर उठाएं। घुटने न मुड़े। पंजों को धरती से स्पर्श करने का प्रयास करें। इस स्तिथि में श्वास सामान्य कर लें। श्वास बाहर निकलते हुए धीरे धीरे वापस आएं। पैरों को फैलाकर विश्राम की स्तिथि में बैठें।

ध्यान का केंद्र – मणिपुर चक्र (ध्यान केंद्र बिंदु के बारे में अधिक जानकारी के लिए आगे दिए लिंक पर जाएँ । ( योग करते समय कहाँ रहे हमारा ध्यान केंद्र बिंदु (Focus Centre Point) or चक्र? ).

नोट :- इसमें ध्यान देने योग्य विशेष बात यह है कि सम्पूर्ण क्रिया में घुटने सीधे रहें।

यह कोणासन बहुत लाभकारी आसन  है। इसे ध्यान तथा सावधानीपूर्वक करने से अनेक रोगों तथा दोषों से मुक्ति पा सकते है। तथा अपने आप को और भी अधिक शक्तिशाली तथा ऊर्जावान महसूस कर सकते है। जो आपके तन तथा मन दोनों के लिए अति लाभकारी है। शरीर में संतुलन बनाने के लिए यह आसन  बहुत लाभकारी है। जो की हमारे लिए महत्वपूर्ण भी है। कोणासन के तरह ही पश्चिमोत्तान आसन भी हमारे शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण आसन है । पश्चिमोत्तान आसन के बारे में अधिक जानकारी के लिए आगे दिए गए लिंक पर जाये। ( योग में विशिष्ट स्थान रखने वाला आसान : पश्चिमोत्तान आसन ) ,अगर आपको हमारे लेख पसंद आया हो तो इसे लाइक जरूर करें साथ ही अपने सुझाव कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें।

Our Score
Our Reader Score
[Total: 0 Average: 0]

Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ajax LoaderPlease wait...

Subscribe For Latest Updates

Want to be notified when our article is published? Enter your email address and name below to be the first to know.