सिर दर्द या माइग्रेन को दूर रखें – चक्रासन (Chakrasana)

गोल आकार को चक्र कहते हैं। शरीर की आकृति इस आसन में गोलाकार जैसी बनती है, इसी कारण इसे चक्रासन (chakrasana) कहते हैं । बहुत थोड़े आसन ऐसे होते हैं, जिनमे रीढ़ और पेट विशेष रूप से प्रभावित होते हैं। यूँ तो इस आसन में तलवे, टखने , पिंडली, घुटने , जंघाएँ, कमर, पीठ, फेफड़े, कंधे, भुजबल्ली, कलाई, हथेली और मस्तिष्क पर प्रभाव आता है। रीढ़  कि एक एक गोटी, जिनमे थोड़ा थोड़ा अंतर होता है, इस आसन में पीछे की ओर झुकने से परस्पर मिल जाती हैं। इसमें रीढ़ सबल व लचकदार बनती है।

  • हम दिन भर सदैव आगे की और झुककर सारी क्रियाएँ करते हैं। इसी से रीढ़ की हड्डी में कुछ न कुछ तकलीफें आती रहती है। सभी दोष पीछे की तरफ मुड़ने से दूर हो जाते हैं।
  • मेरुदंड लचीला होने से शरीर में रक्त संचार व नाड़ी संस्थान सुन्दर बनते हैं।
  • पेट के अवयव तथा फेफड़ों का झुकाव पीछे की और होने से वे अस्वस्थ बनते हैं। महिलाओं के मासिक धर्म एवं गर्भाशय की कमियां दूर होती हैं।
  • मस्तिष्क में रक्त की पूर्ति होती है। इससे जाने अनजाने रोगों से मुक्ति मिलती है। जैसे – सिरदर्द , माइग्रेन आदि।
  • कमर के निचले भाग का दर्द , स्लिपडिस्क तथा ऊपर के रोग (सर्वाइकल का दर्द ) ठीक कर्नर में सहायक है, परंतु ऐसे रोगियों को योग्य योग शिक्षक की देख रेख में अभ्यास करना चाहिए।
  • हड्डियों का कड़ापन तथा हृदय की किसो धमनी में अचानक रूकावट आ जाने वाली स्थिति उत्पन्न नही होती।
  • शरीर की कमजोरी दूर होती है। हाथ पैर की कम्पन्न रुक जाती है। लकवा रोग का निवारण होता है ।

चक्रासन विधि (chakrasana Method)

कमर के बल आसन पर लेट जाएं । एड़ियां व पंजे मिलाएं। पंजे ताने । दोनों घुटनी मोड़ते हुए एड़ियों को नितंबों से सटा दें। पैरो  में थोड़ा फासला रखें। साधना परिपक्व होने पर एड़ी पंजे मिला दें। दोनों हाथों को मोड़ते हुए , कंधों के नीचे उलट कर इस प्रकार रखें कि हथेलियों व तलवों पर जोर देते हुए अपने धड़ को ऊपर उठाएं। धीरे धीरे हथेलियों व तलवों पर जोर देते है अपने धड़ को ऊपर उठाएं । धीरे धीरे वापस आएं । शरीर को ढीला छोड़कर विश्राम करें।

ध्यान केंद्र बिंदु मणिपुर चक्र  (ध्यान केंद्र चक्रों के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएं – योग करते समय कहाँ रहे हमारा ध्यान केंद्र बिंदु (Focus Centre Point) or चक्र?)

  • इसमें ध्यान देने योग्य विशेष बात यह है कि एड़ियां न उठाएं। कमर यथाशक्ति अधिक से अधिक ऊपर उठाएं जिसमे चक्र से आकृति बन जाये। अपने तलवों व हाथों को इस प्रकार स्थित करें की उनके खिसकने की सम्भावना न रहे । वापस आते है पहले अपना सिर को सीधा करें। कन्धों को प्रोथ्वी पर रखें, फिर कमर लगाएं।
  • नए साधकों को इसका अभ्यास धीरे धीरे बढ़ाना चाहिए।
  • युवा लड़के एवं लड़की को शरीर की यौवन शक्ति बढ़ाने हेतु इस श्रेष्ठ आसन से अवश्य लाभ उठाना चाहिए।

सावधानी  – उच्च रक्तचाप तथा हृदय रोगी इस आसन को न करें।

चक्रासन (chakrasana) हमारे शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण आसन है तथा इसे नियमित रूप से करना  चाहिए। चक्रासन (chakrasana) की ही तरह गरुणासन भी हमारे शरीर को लचीला और बहुत तरीके से लाभदायक है । गरुणासन के बारे में अधिक जानकारी के लिए आगे दिए गए लिंक पर जाएँ ( जोड़ो के अनेक रोगों का एक उपाय : गरुड़ासन (Garudasana) ) अपने महत्वपूर्ण सुझाव हमे कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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