गुर्दे (Kidney) के रोग से परेशान हैं तो इसे जरूर पढ़े

हमारा शरीर एक यन्त्र है, जिसके पुर्जे हर समय अपना कार्य स्वाभाविक रूप से करते रहते है। इन्ही में गुर्दे (Kidney) भी है। गुर्दे (Kidney) शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। गुर्दों (Kidney) का सम्बन्ध हमारी मूत्र संबंधी प्रणाली से है। गुर्दे (Kidney) के रोगों में मुख्य रूप से पथरी , बहुमूत्र, रुक रुक कर पेशाब आना आदि है। कई बार गुर्दे (Kidney) में दर्द भी होता है, असहनीय और असाध्य । किसी व्यक्ति को पेशाब न आये और अंदर ही अंदर इकाट्ठा होता रहे तो उससे अत्यंत बेचैनी होगी और इंद्रिय पर दबाव तथा कष्ट होगा। वह न तो अच्छी तरह से लेट सकेगा, न सो सकेगा। एलोपैथी में रबर की नली (कैथिटर) द्वारा पेशाब बाहर निकाला जाता है। कभी कभी उससे घाव तक हो जाता है।

बहुमूत्र रोग में गुर्दे (Kidney) जलतत्व को अधिक मात्रा में बाहर फेंकते है, जिससे शरीर में दुर्बलता आती है। कारण, बहुमूत्र के अनेक आवश्यक तत्व शरीर से बाहर चले जाते हैं। गलत खान पान , शराब, मांस आदि से भी गुर्दे (Kidney) का असह्य दर्द होने लगता है। उसके कारण इस प्रकार हैं –

रोग के कारण

  • भोजन में दूषित, चटपटे, मसालेदार, बासी व बाज़ारू पदार्थों का सेवन।
  • वायु का रुक जाना।
  • रात में सोते समय दूध या जल पीने से।
  • निम्बू व खटाई का अत्यधिक सेवन।
  • वातज पदार्थो का अत्यधिक सेवन (वातज पदार्थो के बारे में अत्यधिक जानकारी के लिए इस लिंक और जाये- शरीर में बिमारियों का कारण : त्रिदोष ).
  • अनाज साफ़ न होने पर पथरी आदि रोग हो जाना।

योगोपचार

गुर्दो (Kidney) में दोष उत्पन्न हो जाने पर अलग अलग प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते है। यदि गुर्दे (Kidney) में पथरी आदि हो तो अर्ध चक्रासन एवं सर्वांगासन करना चाहिए। जल खींचकर मसाने यानी पेशाब की थैली में फेंकना गुर्दों (Kidney) का स्वाभाविक धर्म है। अतः रोगानुसार नासिका द्वारा जलपान करने से जल का प्रभाव गुर्दे (Kidney) खींच लेते हैं और रोग शांत हो जाता है। पानी प्रचुर मात्रा में पीएं।

अर्धचक्रासन (कंधरासान / सेतुबंधासन) – सीधा लेटकर दोनों टाँगों को मोड़ लें और दोनों हाथों से टखने पकड़कर पित्त व् नितंबो को ऊपर उठा लें। यथाशक्ति रूककर पूर्वावस्था में आ जाएं।

सर्वांगासन – सीधा लेटकर दोनों टांगो को आकाश की और उठाएं , नीचे कुहनी का स्टैंड बना रहे। ठोडी कंठ कूप से लगी रहे। । यथाशक्ति रुकें। धीरे धीरे वापस आएं। विराम लें।

आहार सब्जियां – शलगम , गाजर , टिण्डा, लौकी, तुरई, पालक, सीताफल।

दालें – अरहर, मूंग , मोथ की दाल।

फल – चीकू, संतरा, मौसमी, नारियल पानी लें।

मुरब्बे – सेब, गाजर

अन्य सुझाव – सौ ग्राम कुलथी की दाल साफ़ करके रात को पानी में भिगोकर प्रातः पौन किलो पानी में पकानी चाहिए । पककर जब 300 ग्राम रह जाए तो नीचे उतारकर उसके सूप में नमक , काली मिर्च डालकर पीएं। दाल खाना चाहें तो खा लें। काले चनों का रस पियें। बहुमूत्र रोग में जौ का मिश्रण आटे में न करें । सावधानी से गेंहू या अपने सामने स्वयं घर में पिसवाएं। रेतीला पानी न पिएं।

अकसर लोगो में देखा गया है कि वो kidney की अनेक बीमारियों से परेशान है तथा अपने मन की हिचकिचाहट की वजह से वे किसी को अपनी ये बीमारी बता भी नही पाते । लेकिन अब ऐसा नही है , आप बिना दवाई या बिना डॉक्टर के पास गए घर बैठे अपने गुर्दे (Kidney) की बीमारी को ठीक कर सकते है। इस लेख में बताए गए सभी नियामो को ध्यान से पढ़े और अपने जीवन में इसे लागू करें । यकीन मानिए इससे आपको जरूर लाभ होगा । इसी प्रकार आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों और दिनचर्या में परिवर्तन कर के आप अपने दिल (heart) की बीमारी भी दूर भगा सकते है । हृदय रोगों के इलाज के लिए आप दिखाये गए लिंक पर जाएँ ( दिल का मामला है , रखना संभाल के ( Heart Special) )। अपने महत्वपूर्ण सुझाव हमे कमेंट बॉक्स में लिखना ना भूलें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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