अब सर्दियों के मौसम की तैयारी करें – आयुर्वेदिक तरीके से

रक्तवाहिनियों में सिकुड़न (contraction in blood vessel)

सर्दियों के मौसम में रक्तवाहिकाएं (blood vessel)  शरीर की गर्मी को संरक्षित (conserve) करने के प्रयास से सिकुड़ जाती हैं। इसके अलावा सर्दियों में आमतौर पर पसीना भी नही निकलता। इस कारण शरीर में नमक संचित हो जाता है, जिसके कारण रक्तचाप (blood pressure)  बढ़ जाता है और मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है।

फेफड़े पर दुष्प्रभाव

सर्दियों में वायरल इन्फेक्शन और गले व सांस को नलियों में संक्रमण होने के आशंकाएं बढ़ जाती है। इन संक्रमणों के कारण दिल पर बुरा असर पड़ता है।

खान पान का असर

सर्दियों में कई त्यौहार पड़ते हैं। शादी विवाह भी सर्दियों में ज्यादा होते हैं। इस स्थिति में लोग वसायुक्त (fatty) चटपटे आहार ज्यादा खाते हैं। मौसम के नाम और शराब की मात्रा बढ़ा देते है। खाना भी सही समय पर नही खाते है , इससे दिल पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

योग शारीरिक श्रम की कमी

सर्दियों में ठण्ड की वजह से ज्यादा लोग बिस्तर में ही लेटे रहना पसंद करते हैं । वे खाते है और बिस्तर पर लेट जाएं हैं और योग भी नहीं करते। इससे उनका वजन बढ़ जाता है ।

सार्थक सुझाव (meaningful suggestions) –

  1. गर्मियों की अपेक्षा सर्दियों में योग व श्रम की ज्यादा आवश्यकता है क्योंकि सर्दियों में खून ज्यादा गाढ़ा हो जाता है। इसलिए नित्य 1 घंटा योग अवश्य करें। योग करने से हमारा शारीरिक , मानसिक, बौद्धिक व आध्यात्मिक विकास होता है। तनाव दूर होता है। शरीर स्वस्थ व निर्मल बनता है।
  2. हाई ब्लड प्रेशर वालों को नमक की मात्रा कम कर देनी चाहिए। निम्बू पानी लेना चाहिए।।
  3. हृदय रोगियों को कड़ाके की ठण्ड से बचना चाहिए।
  4. अर्जुन छाल का चूर्ण , एक चम्मच दूध के साथ या शहद के साथ लें।
  5. अपना भोजन उचित मात्रा, उचित समय व उचित गुण वाला लें।
  6. अपने सोने , जागने , भोजन का समय निश्चित करें।
  7. निषेधों का पालन करते हुए शवासन सबसे उत्तम है क्योंकि इससे हृदय को शक्ति मिलती है।
  8. गहरे लंबे श्वास व उज्जायी प्राणायाम से हृदय पुष्ट बनता है।
  9. मानसिक तनाव से बचें और अपनी सोच को सकारात्मक बनाए ।
  10. अनियमित दिनचर्या , अनियमित खान पान से बचें तथा सदा सुपाच्य व संतुलित भोजन लें। आयुर्वेद के अनुसार नियमित दिनचर्या जानने के लिए इस लिंक पर जाएं । ( आयुर्वेद के अनुसार कैसा रहे आपका दिनचर्या – Your daily routine ).
  11. अपान मुद्रा लगाएं , अपान मुद्रा के बारे में जानने के लिए इस लिंक पर जाएं ।( कैसे हो शरीर के मल पदार्थ का विसर्जन : अपान मुद्रा ).

बदलते हुए मौसम में अक्सर लोग बीमार पड़ते है। खासकर जब सर्दी का मौसम आता है। सर्दी के मौसम में ज्यादा बीमारी फैलने की आशंका रहती है। इसलिए हमें शुरू से ही इसकी तैयारी कर के रखनी चाहिए। हमारी भारतीय चिकित्सा पदत्ति आयुर्वेद में अनेक ऐसे उपाय बताये गए हैं जिससे हम अपने आपको अनेक बीमारियां होने  से पहले ही बचा सकते है। इस जानकारी को आगे भी बढ़ाए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो का लाभ हो। सर्दियों में निमोनिया तथा अस्थमा जैसी बीमारियां आम बात है । आयुर्वेदानुसार निमोनिया के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप इस लिंक और जा सकते है ( निमोनिया (pneumonia) को जड़ से खत्म करने का राम बाण उपाय ) तथा अस्थमा के इलाज के बारे में जानने के लिए आप आगे दिए गए लिंक और जा सकते है । ( अस्थमा (Asthma) का जड़ से इलाज – अब घरेलु नुख्सों से ) अपने महत्वपूर्ण सुझाव हमे कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें।

 

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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