पादांगुष्ठासन- सबसे आसान और फायदेमंद आसन

सदियों से योग हमारे जीवन का आधार है, जो हमे जीने की कला सिखाता है, योग हमें ज्ञान देता है, हमें शक्ति प्रदान करता है। योग हमें बिना कुछ लिए बहुत कुछ देता है जिससे हम अपने जीवन को सरल तथा रोग मुक्त बना सकते हैं।कुछ मिले तो आकर्षण होता है, उत्साह बना रहता है। अतः लोभ जीवन में बड़े काम की चीज मानी जाती है, परन्तु ऐसी वस्तु के लिए जिसका वियोग निश्चित है, उसका लोभ करना , उसको पाने की चेष्टा करना , इसी उधेड़- बुन में अपनी प्राण शक्ति को समूल नष्ट कर देना कहाँ की बुद्धिमता है? फिर , क्या पाने का लोभ करना चाहिए इसका उत्तर योग देता है। योग में वह क्षमता है कि जो मांगोगे वह मिलेगा।  आज जिस आसन के बारे में बताने जा रहे है उसका नाम है पादांगुष्ठासन। पादांगुष्ठासन रीढ़ को लचीला बनाने के बाद वीर्य निर्माण या सुरक्षा संबंधी क्रिया करें तो ऊर्जा उत्पादन की क्षमता बढ़ जाती है। किशोर किशोरियों के लिए पादांगुष्ठासन अत्यन्त उपयोगी है।

  • सिवनी नाड़ी एड़ी से दबने पर वीर्य की अधोगति नहीं होती तथा स्वप्नदोष नहीं होता।
  • वात तथा रक्त सम्बन्धी विकार (बवासीर आदि) दूर होते है। रक्त संचार ठीक होता है। (वात आदि त्रिदोष के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस आगे दिए गए लिंक पर जाएँ । ( शरीर में बिमारियों का कारण : त्रिदोष )
  • पैर के पंजो व अंगूठों पर दबाव पड़ने से नेत्र दृष्टि कमजोर नहीं पड़ती।
  • संयम शक्ति का विकास तथा शरीर का सन्तुलन होता है।
  • पैरों की नस नाड़ियां पुष्ट तथा लचीली बनती है।

पादांगुष्ठासन विधि

दोनों पैरों के पंजो के बल बैठ जायँ। दाएं पैर की एड़ी को गुदा तथा जननेन्द्रिय के बीच सिवनी नाड़ी पर स्थिर करें। दाएं पैर की जंघा पर बाएं पैर को इस प्रकार सावधानी से रखें जिससे दाएं पैर के पंजे पर विशेषतः अंगूठे पर पूरे शरीर का भार सन्तुलित रह सके। दायां हाथ बाएं घुटने पर तथा बायाँ हाथ बाएं टखने पर ज्ञानमुद्रा में रखें। इस क्रिया को दूसरे पैर से भी करें।

ध्यान का केंद्र– मूलाधार चक्र

  • प्रारम्भ में नए साधक को एक हाथ का सहारा लेकर सन्तुलन बनाना चाहिए। थोड़े अभ्यास के बाद उसकी आवश्यकता नहीं रहेगी।
  • इसमें ध्यान देने योग्य बात यह है कि जितनी देर एक पैर से अभ्यास किया जाये , उतनी ही देर दूसरे पैर से भी अभ्यास करें।

पादांगुष्ठासन बहुत लाभकारी है। इसे ध्यान तथा सावधानीपूर्वक करने से अनेक रोगों तथा दोषों से मुक्ति पा सकते है। तथा अपने आप को और भी अधिक शक्तिशाली तथा ऊर्जावान महसूस कर सकते है। जो आपके तन तथा मन दोनों के लिए अति लाभकारी है। शरीर में संतुलन बनाने के लिए यह आसन बहुत लाभकारी है। जो की हमारे लिए महत्वपूर्ण भी है।

योग से अनेक रोग दूर होते हैं , इसलिए योग करें रोग मुक्त रहें। यह पोस्ट आपको कैसा लगा इस बारे में अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें। आपको और भी अलग अलग योग के बारे में जानकारी प्राप्त होते रहेंगे।

पद्मासन एक बहुत ही आसान और लाभकारी आसन है। पादांगुष्ठासन के तरह ही पद्मासन के भी अनेक लाभ है। इसलिए इस आसन को नियमित रूप से अपनाएं। पद्मासन के बारे में अधिक जानकारी के लिए दिए गए लिंक पर ( अपने शरीर को लचीला बनाएं पद्मासन (Padmasana) से ) क्लिक करे, और जानकारी प्राप्त करें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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