गठिया की बीमारी का रामबाण उपाय – आकर्ण धनुरासन

जीवन में आने वाली अति भावुकता, भावावेश, काम आदि नियंत्रण में रहे तो जीवन की सार्थकता है। जैसे कार की चाल अच्छी हो पर ब्रेक न हो तो, व्यक्ति में दौड़ने की क्षमता हो पर जब रुकना चाहे रुक न सके , क्रियाशील ही रहे और विश्राम लेना न जाने , शक्ति का उपार्जन करे परन्तु उनका ठीक ठीक उपयोग न हो , पैसा खूब कमाये परन्तु उसका अच्छे कामों में उपयोग न हो तो वह जीवन की परिपूर्णता नहीं है। योग इन स्तरों पर ताल मेल बिठाता है।योग भी जीवन में सही ताल मेल बिठाने का काम करता है। जब हम अपना कार्य कर के शरीर को थकान पहुंचा देते हैं तब योग हमारे थके हुए शरीर को आराम देता है। यह आसन जरुरी है उन लोंगो के लिए जो देर तक बैठ कर टेबल वर्क करते हैं।

धनुरासन ठीक धनुष खींचकर बाण छोड़ने की क्रिया के समान है। उसी तरह शरीर को मोड़ना, खींचना व छोड़ना आदि की क्रिया इसमें होती है। उसी तरह शरीर को मोड़ना, खींचना व छोड़ना आदि की क्रिया इसमें होती है। हाथ से पैर का अंगूठा पकड़ कर कान तक लाना आकर्ण धनुरासन है। यह आकर्ण धनुरासन भी देर तक बैठकर टेबल वर्क करने वालों के लिए रामबाण सिद्ध हुआ है। इस आकर्ण धनुरासन की उपयोगिता पैरों को , नितम्बों को तथा कंधो को सबल बनाने में है।

  • पैर के अंगूठे को पकड़कर कान के साथ लाने से अंगूठे में स्तिथ मुख्य नाड़ी प्रभाव में आती है।
  • इस आकर्ण धनुरासन के निरन्तर अभ्यास से घुटनों के जोड़, पिण्डलियाँ, जंघा, नितम्ब, भुजा, कन्धा, छाती, पीठ आदि लचीले, सुंदर व मजबूत बनते हैं ।
  • दुर्बल हाथ व पैर की नसें पुष्ट होती हैं। बहुत लिखने वालों के हस्त की नसें कमजोर होकर सूखने नहीं पातीं।
  • बहुत देर तक बैठे रहने वालों के पैर की नसें सक्रिय हो जातीं हैं।
  • जिनका पाचन शक्ति ठीक नहीं है, उनका पाचन शक्ति ठीक रहती है।
  • गठिया की शिकायत दूर होती है।
  • लकवे की शिकायत दूर होती है।
  • जिगर व बड़ी आँतों के रोग भी ठीक हो जाते हैं।
  • प्राण निरोध से प्राण बलवान होते हैं। फेफड़ो में वायु ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है ।

आकर्ण धनुरासन विधि

आसन पर दोनों पैरों को फैला कर बैठें, एड़ियां पंजे मिला कर पंजे ताने। बाएं पैर को दाएं घुटने पर रखें। दाएं हाथ से बाएं पैर का अंगूठा तथा बाएं हाथ से दाएं पैर का अंगूठा छल्ला बनाते हुए पकड़ें। बाएं अंगूठे को धीरे- धीरे श्वास भरते हुए दाएं कान के पास लाएं। श्वास बाहर निकलते हुए वापस आएं। यही क्रिया दूसरे पैर से करें।

ध्यान का केंद्र मूलाधार चक्र (ध्यानकेद्र बिंदु के बारे में अधिक जानकारी के लिए आगे दिए गये लिंक पर जाएं) ( योग करते समय कहाँ रहे हमारा ध्यान केंद्र बिंदु (Focus Centre Point) or चक्र? )

  • इसमें विशेष बात यह है कि पैर का अंगूठा कान के पास लाना है न की कान को अंगूठे के पास।
  • फैले हुए पैर का घुटना नहीं मुड़ना चाहिये।
  • आसन करते समय कमर व गर्दन सीधी रहे।

आकर्ण धनुरासन के बहुत ही सिद्ध और लाभदायक आसन है। चक्रासन भी आकर्ण धनुरासन के समान ही हमारे शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण आसन है। चक्रासन के बारे में अधिक जानकारी के लिए आगे दिए लिंक पर जाए।( सिर दर्द या माइग्रेन को दूर रखें – चक्रासन (Chakrasana) )

अपने महत्वपूर्ण सुझाव हमे कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें।

 

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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