एनीमिया (Anemia) यानी खून की कमी , अब घर बैठे इसका इलाज पाएं

एनीमिया (Anemia) एक ऐसी बीमारी है , जिसमे शरीर में  खून की कमी होने का मतलब है खून में हीमोग्लोबिन के स्तर का कम हो जाना। इस बीमारी में रक्त की ऑक्सीकरण क्रिया में कमी आ जाती है। आजकल एनीमिया (Anemia) से पीड़ित रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी होती जा रही है। रोगी की आँख के अंदर की झिल्ली या नाखुनो की अग्रभाग की लालिमा देखकर ही रोग का पता चल जाता है। ऐसे रोगी में निम्न लक्षण पाए जाते हैं।

एनीमिया (Anemia) के लक्षण

  1. जरा सी मेहनत या चलने पर थकावट महसूस होगा ।
  2. दिन भर लेटे रहने की इच्छा करना ।
  3. जरा से तेज आवाज सुनते ही हृदय गति बढ़ जाना।
  4. भूख की कमी व भोजन के प्रति अरुचि ।
  5. नींद न आना ।
  6. सिर दर्द बना रहना।
  7. त्वचा का रंग पीला पड़ जाना।
  8. रोग बढ़ने और टखनों में सूजन आना।
  9. नीचे से ऊपर उठने और चक्कर आना।
  10. थोड़ा सा चलने पर सांस फूलना।

एनीमिया (Anemia) के कारण

  • स्त्रियों के मासिक धर्म के समय अधिक रक्तस्त्राव होना।
  • दुर्घटना में रक्त बह जाना।
  • शरीर में पोषक तत्त्व , आयरन, फोलिक एसिड , प्रोटीन की कमी।
  • शरीर की चयापचय क्रिया में गड़बड़ी।
  • बवासीर के कारण खून का गुदाद्वार से बह जाना।
  • आंतो में छाले होने और दस्त के साथ साथ खून निकलते रहना।
  • प्रसव के समय अधिक रक्तस्त्राव होना।
  • पेट में हुकवर्म तथा मलेरिया के कीटाणु होने पर खून की कमी होना।
  • गुर्दे की खराबी के कारण।
  • थैलेसीमिया के कारण खून बनना ही बंद हो जाता है।
  • शरीर की किसी अंग जैसे यकृत , अस्थि , मज्जा के कार्यों में व्यवधान पड़ने और खून बहना कम हो जाता है।

एनीमिया (Anemia) की जांच

शरीर में इस तरह के लक्षण दिखाई दे तो तुरंत खून में हीमोग्लोबिन की जांच कराएं ।एक वयस्क व्यक्ति में हेमोग्लोबिन का सामान्य स्तर 13 या अधिक होना चाहिए । वयस्क स्त्री में 12 या इससे अधिक है तो स्वस्थ है। हीमोग्लोबिन का अधिक बढ़ना भी शरीर के लिए खतरनाक है। इससे खून में गाढ़ापन आ जाता है, जिससे रक्त कहीं भी थक्के के रूप में जमा हो सकता है।

आहार ही उपचार

एनीमिया (Anemia) पीड़ित रोगी का आहार ही उपचार है । ऐसे रोगी के आहार में लौह तत्व (आयरन) की अधिकता होनी चाहिए । एनीमिया (Anemia) या रक्ताल्पता के रोगी को अपने आहार में निम्न खाद्य पदार्थों का समावेश कर लेना चाहिए –

  1. हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे – मेथी, पुदीना, मूली के पत्ते, चौलाई इत्यादि के आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  2. अंकुरित अनाज लगभग 60 ग्राम प्रतिदिन नाश्ते में या भोजन के साथ लें।
  3. गुड़ में लौह तत्त्व पकाया जाता है। खाने के बाद मिठाई के जगह गुड़ खाएं।
  4. रात्रि में भीगी हुई अंजीर , किशमिश में आयरन खूब होता है।
  5. आयरन पाए जाने वाले खाद्य पदार्थों के साथ साइट्रिक एसिड युक्त पदार्थ निम्बू, आंवला या संतरे का प्रयोग जरूर करें । इससे शरीर में आयरन का अवशोषण अच्छी तरह से हो जाता है।
  6. लोहे की कढ़ाई में खाद्य पदार्थों को पकाने से उसमे आयरन की प्रतिशत मात्रा बढ़ जाती है।या जिन खाद्य पदार्थों में आयरन नहीं है , उनमे आयरन के गुण आ जाये है।
  7. तिल में लौह तत्व प्रचुर मात्रा में होता है। सर्दी के दिनों में गुड़ व तिल मिलाकर लड्डू बनाकर खाने से खून की कमी दूर होती है।

परहेज

  1. चाय का प्रयोग बन्द कर देना चाहिए। चाय का प्रयोग करने से शरीर आयरन का अवशोषण नही कर पाता ।
  2. आयरन युक्त कैप्सूल का प्रयोग कम करना चाहिए। इनके अधिक प्रयोग से शरीर में कुछ अन्य तत्वों की कमी आ जाती है।
  3. खटाई का परहेज रखें।
  4. तले भुने पदार्थ भी कम लें।

खून की कमी आज कल के लोगों में सामान्य रूप से पाए जाने वाला रोग है । इसके इलाज का सबसे अच्छा उपाय घर पर ही होता है। इसी प्रकार गुर्दे यानी किडनी के अनेक रोगों को घर बैठे ही ठीक कर सकते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए – गुर्दे (Kidney) के रोग से परेशान हैं तो इसे जरूर पढ़े  । अपने महत्वपूर्ण सुझाव हमे कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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