आयुर्वेद (Ayurveda) के अनुसार विरूद्ध आहार (against diet) क्या होते है ? और कौन-2 से हैं ?

जिस तरह पौष्टिक और हितकारी (beneficial)  आहार का सेवन करने से स्वास्थ्य की रक्षा होती है उसी तरह अहितकारी (harmful) और अपथ्य (impairment) भोजन का सेवन करने से स्वास्थ्य का नाश होता है । कुछ खाद्य पदार्थ तो प्रकृति (by nature) से  ही दोषों का प्रकोप करने वाले , रोगकारक , भारी आदि होने से अपथ्य होते है, लेकिन कुछ प्राकृतिक रूप से अकेले तो बहुत गुणकारी और स्वास्थ्य वर्धक होते हैं , लेकिन जब इन्ही पदार्थो को किसी अन्य खाद्य पदार्थ के साथ लिया जाये , तो ये लाभ की जगह हानि पंहुचाते है और अनेक प्रकार के रोगों का कारण बनते है । ये विरुद्धाहार कहलाते है ।आयुर्वेद ( Ayurveda) में कहा गया है कि इस प्रकार के विरुद्धाहार का निरंतर सेवन करते रहने से ये शरीर पर धीरे धीरे दुष्प्रभाव डालते है ।

किसके साथ क्या विरुद्ध है?

  • दूध के साथ  – दही,  नमक,  मूली,  इमली, खरबूजा, बेलफल, नारियल, आम्रातक, नींबू, लिकुच (monkey fruit) , करोंदा, कमरख (Chinese gooseberry), जामून, अनार, आंवला,  उड़द, मोथ, सत्तू, तेल, तथा अन्य प्रकार के खट्टे फल या खटाई,  मछली, आदि विरुद्ध है।
  • दही के साथ खीर, दूध, पनीर, गर्म पदार्थ, खीरा , खरबूजा, ताड़ का फल आदि विरुद्ध है ।
  • खीर के साथ – कटहल, खटाई, सत्तू, शराब, आदि विरुद्ध है।
  • शहद के साथ – मकोय,  घी,  वर्षा का जल,  तेल , अंगूर,  कमल के बीज, गर्म दूध या कोई भी गर्म पदार्थ आदि विरुद्ध है।
  • शीतल जल के साथ – घी, तेल, गर्म दूध या गर्म पदार्थ, तरबूज,  अमरूद,  खीरा,  ककड़ी,  मूंगफली, आदि विरुद्ध है।
  • घी के साथ – समान मात्रा मे शहद, ठण्डा जल विरुद्ध है।
  • खरबूजा के साथ – लहसून, दही,  दूध,  मूली,  पानी आदि विरुद्ध है।
  • तरबूज के साथ – ठण्डा पानी, पुदीना आदि विरुद्ध है ।
  • चावल के साथ – सिरका विरुद्ध है।
  • नमक – अधिक मात्रा में अधिक समय तक खाना विरूद्ध है ।
  • केला के साथ – तक्र (मट्ठा) विरुद्ध है।

इस प्रकार के विरुद्ध आहार के सेवन से शरीर के दोष असन्तुलित हो जाते हैं , परिणामस्वरुप अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं । इसलिए इन सबका विचार करके ही खाद्य पदार्थों का  सेवन करना चाहिए।

विरुद्ध आहार से होने वाले रोग :

चर्मरोग (skin diseases) , विषाक्त भोजन (food poisoning),  विसर्प (herpes), टी.बी. , नाक की हड्डी का बढ़ना, बुखार, अन्धापन आदि ।

विरुद्धाहार का निरतंर सेवन करने से हल्के विष (slow poison) के समान धीरे धीरे मृत्यु का कारण भी बन सकता है ।

कुछ पदार्थ स्वभाव से ही हितकर होते हैं तो कुछ अहितकर होते हैं। जैसे मूंग, सेंधा नमक ,आंवला,  मुनक्का, गाय का दूध ,ये सभी स्वास्थ्य के लिए हितकर होते है। इसके विपरीत अधपके (कच्चे फल ) ,अधिक तीखे पदार्थ – जैसे लाल मिर्च आदि , अधिक खट्ठे पदार्थ – जैसे झमली, आमचूर, आदि तथा खाद्य को सड़ाकर बनाए हुए या केमिकल आदि से बनाए गए पदार्थ , ये सभी स्वभाव से ही अहितकर हैं । इनमे यदि हितकर पदार्थों का सेवन मात्रा (quantity) , प्रकृति आदि के अनुसार तरीके से न किया जाये तो वे भी अहितकर पदार्थों के समान ही हो सकते हैं। शरीर अन्न से ही बना है। इसलिए सोच समझकर अपने भोजन का चयन करना चाहिए , लोभ अथवा अज्ञान के कारण अहितकारी आहार का सेवन कभी भी नहीं करना चाहिए ।

 

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