आयुर्वेद (Ayurveda) के अनुसार-गुड़ (Jaggery) है उत्तम गुणों से भरपूर

ईख और गुड़ (Jaggery) का वर्णन आयुर्वेद (Ayurveda) में खूब आया है। ईख की खेती आदिकाल से होती आयी है। ईख के रस को और अधिक पकाने पर , गाढ़ा होने और ढेले के सामान बढ़ने पर जो रूप होता है इसे गुड़ कहते है। स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमे मेवा , मूंगफली भी डाल सकते है। प्राचीन काल में गुड़ को मांगलिक द्रव्य के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है। गणेश पूजन में गुड़ और नारियल का नैवेद्य देने और गुड़ की आहुति देने का विधान है। शुभ कार्य आरंभ करने हेतु गुड़ खाना शगुन माना जाता है । गुड़ मिठाई का भी काम करता है। इसे शिशु प्रिय भी कहा जाता है । शारीरिक  श्रम करने वालों को गुड़ से शक्ति व ऊर्जा मिलती है। चरक के अनुसार गुड़ रक्त ,मांस ,मज्जा व मेद वर्धक पदार्थ है। हारित संहिता गुड़ के गुणों का वर्णन करते हुए कहती है कि यह क्षय, खांसी , दुर्बलता, पाण्डु रोग , खून की कमी दूर करने में बहुत उपयोगी में । राज निघण्टु में बताया गया है कि गुड़ त्रिदोष नाशक , मल , मूत्र दोष हर, खुजली, प्रमेह नाशक , प्रचंड शक्तिदाता और पाचक पदार्थ है । यह पित्त नाशक और रक्त शोधक है । नया गुड़ आसव व अरिष्ट बनाने के काम आता है । एक साल पुराना गुड़ उत्तम माना जाता है । हृदय रोग में श्रेष्ठ है ।

 आयुर्वेद (Ayurveda) के अनुसार -Jaggery

  • 10 ग्राम अदरक के साथ  20 ग्राम गुड़ खाने से कफ दूर होता है ।
  • 1/2 चम्मच बड़ी हरड़ के साथ 15 ग्राम गुड़ लेने से पित्त का नाश होता है।
  • एक चुटकी शौंठ के चूर्ण के साथ 15 ग्राम गुड़ खाने से वात विकार दूर होते है।
  • प्रसूतिजन्य रोगों में पुराना गुड़ ही काम आता है ।
  • सर्दी जुकाम में 7 काली मिर्च के साथ ही एक डली गुड़ खाना चाहिए ।
  • श्वास रोग के 1/2 चम्मच सरसो के तेल के साथ 30 ग्राम गुड़ खाना चाहिए ।
  • अतिसार में 1 चम्मच बेलगिरी चूर्ण के साथ 20 ग्राम गुड़ का सेवन करना चाहिए।
  • मूत्र शुद्धि के लिए दूध में गुड़ मिलाकर सेवन करना चाहिए।
  • यदि किसी को विषैले जंतु ने काट लिया हो तो जले हुए गुड़ को डंक के स्थान पर लगाना चाहिए।

गुड़ में पुष्टिवर्धक सभी गुण मौजूद रहते है  इसलिए चैत्र माह को छोड़कर पुरे साल गुड़ के साथ दूध खाया पिया जाता है और भोजन के बाद गुड़ खाया जाता है । इसमें कैल्शियम , तांबा , लौह व फॉस्फोरस अच्छी मात्रा में पाया जाता है। बिना मसाले का गुड़ खाना चाहिए ।

गुड़ अनेक रोगों में फायदेमंद है । यथा –

  1. भोजन करने के बाद गुड़ खा लेने से भोजन शीघ्र पचता है और गैस नही बनती।
  2. यदि बच्चो के पेट में कीड़े हो तथा वे दवाई खा रहे हो तो उसके पहले थोड़ा गुड़ खा ले। आंतो में चिपके कीड़े गुड़ खाना शुरू कर देते है । बाद के दवा के साथ बाहर आ जाते है।
  3. यदि आप हिचकियों से परेशान है तो पुराने से पुराने 30 ग्राम गुड़ में पिसी हुई चुटकी भर सौंठ मिलाकर कुछ देर सूंघे , हिचकियाँ बन्द हो जाएंगी।
  4. यदि आप सर्दी के प्रारम्भ में गुड़ व काले तिल के लड्डू कुछ दिन खा ले तो सर्दी, जुकाम , खांसी आदि रोगों से बचे रहेंगे।
  5. यदि सूखी खांसी सता रही हो तो सरसो के तेल में गुड़ मिलाकर चाटे।
  6. हृदय के दुर्बलता में खाने के बाद थोड़ा सा गुड़ खाने से शक्ति मिलती है।
  7. यदि आधे सर का दर्द परेशन कर रहा हो तो एक हिस्सा गुड़ और आधा हिस्सा घी मिलाकर खा ले।
  8. सर्दी लग जाये तो एक चम्मच घी में 15 ग्राम गुड़ व चुटकी भर सौंठ भूनकर एक दो दिन , दिन में दो बार ले।
  9. गठिया बाय में चुटकी भर सौंठ का चूर्ण ,20 ग्राम गुड़ को भूनकर  प्रातः-सांय खाये।
  10. गुड़ का शरबत पीने से सीने की जलन समाप्त जो जाती है या गुड़ मिला सत्तू खाये।

अतः गुड़ को अपने दैनिक जीवन में अपनाये और अनेक रोगों से प्राकृतिक रूप से  बचे। सर्दी के समय में गुड़ अमृत के सामान है। उसी प्रकार अपने रोगों को प्राकृतिक रूप से जानने के लिए इस लिंक पर जाये ( आयुर्वेद के अनुसार रोगों को पहचानने के आठ तरीके -अष्ठविध रोग परीक्षा ) और अपने सुझाव कमेंट बॉक्स में देने न भूले ।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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