दिल का मामला है , रखना संभाल के ( Heart Special)

आपका हृदय (Heart) आपका जीवित रहने का सबसे आखिरी प्रमाण है। ये शुद्ध रक्त को पम्पिंग कर पुरे शरीर में भेजता है। यह 24 घंटे में 8 टन रक्त भेजता है। इसकी मांसपेशियां इतनी शशक्त होती है जो कभी थकती नहीं। आरामपरस्त  या स्वप्न अवस्था में इसकी धमनिया धीमी हो जाती है। परिश्रम करने वालो का हृदय पुष्ट होता है।

कब खराब (रोगी) होता है यह दिल ( Heart)

रक्तवाहिनियां (धमनियां) जब कड़ी हो जाती है या सिकुड़ जाती हैं। जब इनमे चर्बी का जमाव होने पर कुछ कुछ या पूरी रूकावट हो जाती है तो रक्त का प्रवाह नहीं हो पाता , तब इसे दिल का दौरा कहते है।

कैसे ख़राब होता है यह दिल( Heart)

  • गलत खानपान से
  • गलत दिनचर्या से
  • मानसिक तनाव से
  • उच्च रक्तचाप से
  • मधुमेह के रोग होने से
  • शराब, सिगरेट के सेवन से
  • नकारात्मक सोच रखने से

कैसे संभाले इस दिल कोक्या उपचार है इस दिल( Heart) का

दिल को निम्न तरीकों से ठीक रखा जा सकता है –

भोजन को ठीक करके  –

  • उचित मात्रा में, उचित समय पर , उचित गुणवत्ता वाले भोजन लें। तरल भोजन, जूस, सूप एवं फल लें ताकि जल्दी पच जाए।
  • 80% क्षारीय, 20%अम्लीय, फाईबर युक्त, वसा रहित या कम से कम वसा ( तला भुना न हो) ।
  • हल्का भोजन, उबला भोजन , ताज़ा भोजन लें । पैकेट बन्द , बासी भोजन न लें।
  • सोने से 2 घंटे पूर्व, शांत भाव से , बिना बातचीत किये हुए, चबा चबा कर भोजन लें।
  • खाने के बाद 15 मिनट विश्राम के बाद 15 मिनट अवश्य टहलें।

दिनचर्या ठीक करें – ( आयुर्वेद के अनुसार कैसा रहे आपका दिनचर्या – Your daily routine )

  • जल्दी सोना, जल्दी उठने से ही 80% से अधिक रोग ठीक हो जाते हैं।
  • प्रातः उठकर , नहा धोकर, सैर एवं योग करने पार्कों में जाएँ।
  • खुली हवा में गहरे , लंबे श्वासों द्वारा।
  • खाली न बैठें। शुभ कार्यों में सेवा देने के लिए तत्पर रहें।
  • योजना बद्ध कार्य करें। कार्य की अधिकता न होने दें।
  • हड़बड़ाहट न करें।

सोच अच्छी करें

  • तनाव न आने दे। मन शांत रखें।
  • व्यवहार में कुशलता लाएं।
  • सकारात्मक सोच रखें। नकारात्मक सोच न आने दें।
  • शारीरिक परिश्रम करते रहें इससे कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है।

इसके साथ ही हृदय रोगों से मुक्ति के लिए प्रातः  एक छोटा चम्मच त्रिफला चूर्ण के सेवन को ‘इलाज से बचाव बेहतर है ‘ नियम के रूप के अपनाये।  चलते हुए कोई काम करते हुए श्वास फूल जाये तो बीच बीच में विश्राम लें। इससे दिल ठीक रहेगा ।अगर आपका बहुत व्यस्तता पूर्ण दिनचर्या रहता है तो अपान मुद्रा को भी जीवन में नियमित रूप से अपना सकते है । इस मुद्रा को आप कहीं भी किसी भी वक्त कर सकते है।  इसके बारे में जानने के लिए इस लिंक और जाएँ ( कैसे हो शरीर के मल पदार्थ का विसर्जन : अपान मुद्रा ) । अपने महत्वपूर्ण सुझाव हमे लिखना न भूलें।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

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