किचन में पाइये अपने सभी बिमारियों का इलाज-Home Remedies by Spices

गंधवर्धक तत्त्व जो खाद्य उत्पाद , रंग और खुशबू आदि गुणों को बढ़ाते है, वह मसाले (Spices) की श्रेणी में आते हैं। छोटे पौधे -हर्ब भी इसी मसाले वर्ग में आते है। मसाले , अधिकतर ताजी हरि पत्तियाँ , डण्डियाँ या फूल होते हैं।

लौंग

यह फूल की सूखी कली होता है। इसमें मुख्य तत्त्व युजिनॉल होता है। इसमें कीटाणुनाशक गुण है। लौंग का तेल दांतो के दर्द निवारण में सहायक होता है।

जीरा

यह सूखा बीज होता है। उसमें एल्डिहाइड क्यूमिनों प्रमुख तत्त्व होता है। यह पाचन क्रिया बढ़ाता है। इसके प्रयोग से भोजन में स्वाद और सुगंध की वृद्धि होती है। जीरे में क्सालाइडय  नामक सक्रिय तत्त्व होते हैं जो कैंसर विरुद्ध रक्षात्मक एन्जाइम के स्टार को बढ़ाते हैं। गर्म मसाले , चाट, आदि मसालों में जरूर डाला जाता है।

मिर्च

यह लाल , हरा फल है। इसे ताज़ी या सुखा  प्रयोग में किया जाता है। इसमें मुख्य तत्त्व कैपसीन होता है। इसका प्रयोग स्वाद बढ़ाने , भोजन में तीखापन प्रदान करने में किया जाता है। अधिक प्रयोग अल्सर जैसे रोगों को उत्पन्न करता है।

हल्दी

यह खुशबूदार रंगदार जड़ होती है। इसमें करक्यूमिन रंग प्रदान करने वाला तत्त्व होता है। यह रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्टार को कम करने में सहायक होती है। इसमें  हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करके शरीर को बचाने की क्षमता होती है। यह सूजन और दर्दनिवारक है। यह सर्दी , जुकाम में भी उपयोगी है।

धनिया

यह बीज या पत्ते के (हर्ब) के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसका मुख्य तत्त्व जरेनियोल होता है। अन्य मसलों की भांति यह भोजन में स्वाद बढ़ाता है। गैस निवारक तथा उदर व वमन की समस्या को ठीक करता है। इसे कैंसर विरोधी औषध मन जाता है।

केसर

यह क्रोकस फूलों के स्टिग्मा से प्राप्त होता है। इसका प्रमुख तत्त्व क्रोसीन रंग प्रदान करने वाला तत्त्व है। यह भोजन में पीलापन व खुशबू लाता है। इसे कुल्फी , रसमलाई , श्रीखंड , पुलाव तथा ठंडी में प्रयोग किया जाता है।

कालीमिर्च

यह सूखा फल होता है। इसका प्रमुख तत्त्व पेपरीन है। जिससे तीखापन होता है। साबुत काली मिर्च का आवरण हटाने से सफ़ेद मिर्च निकलती है जो कम तीखी होती है। इसका प्रयोग अपच, उल्टी , आँत और गुर्दे संबंधी विकारों में किया जाता है।

अजवाइन

यह बीज रूप में प्रयोग में लाया जाता है। इसमें मुख्य तत्व थायमोल होता है। थायमोल चबाने पर सक्रिय होती है। इस में जीभ को निश्चेत करने की क्षमता है। यह अपच में असरदायक होता है।

सौंफ

यह सुख फल होता है। इसका प्रमुख तत्त्व एनेथियोल होता है । यह सुगंधवर्धक , गैस निवारक तथा मुंह की दुर्गन्ध हटाने में सहायक होती है।

लहसुन

यह कली रूप में प्राप्त होता है। इसका प्रमुख तत्त्व एलीसीन होता है। यह रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। आंतों में बैक्टीरिया जैसे हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है। पाचन – विकारों को ठीक करता है। यह भोजन में तेज गंध को उत्पन्न करता है।

अदरक

यह भूमिगत टहनी होता है। इसका प्रमुख तत्त्व जिन्जरओल होता है। यह भोजन में तीखापन और स्वाद को लाता है। इसमें एन्टीऑक्सीडेन्ट गुणवत्ता होती है। यह सूक्ष्म जीवाणुओं को नष्ट करता करने का क्षमता रखता है। यह रक्त के संचार को नियमित एवं नियंत्रित रखता है। जोड़ों के दर्द में भी हितकारी होता है। खांसी जुकाम को लाभ देता है। यह अपच निवारक है।

पुदीना , बेसिल, थायम , पारसले, सेज़, रोजमेरी , लेमनग्रास, हींग, तेज़ पत्ता , इलायची, मेथीदाना कोकम, अमचुरप पाउडर , सरसो के दाने , जायफल, खसखस, इमली आदि का प्रयोग भारत के सदियों से किया जा रहा है। इन मसलों के बिना भारत के भोजन की कल्पना भी नहीं  की जा सकती है । इन मसालों का जितना महत्त्व भोजन में स्वाद के लिए है , आयुर्वेद  के अनुसार उतना ही महत्व स्वास्थ्य के लिए भी है।

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Nidhi Patel

Specialized in Vedic literature with professional experience in field of Ayurveda , & one year experience in content writing makes me able to share my views with others for the benefits of mankind

One thought on “किचन में पाइये अपने सभी बिमारियों का इलाज-Home Remedies by Spices

  • June 14, 2017 at 12:43 pm
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    It’s hard to find knowledgeable individuals on this subject, but you sound like you are aware of what you are talking about! Thanks

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