Women Health

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कैसे महिलाओ के पोषाहार, जीवन पर्यन्त बदलते रहते हैं ?
शरीर तभी स्‍वस्‍थ होगा जब आप स्‍वस्‍थ और पौष्टिक आहार लेंगे। बचपन और किशोरी अवस्थाओ में पोषण की जरूरते अलग होती हैं, जहाँ प्रोटीन और कैल्शियम पे ज्यादा जोर दिया जाता हैं ताकि शरीर का विकाश एवम हड्डीओ का अच्छे से मजबूतीकरण हो सके और आगे आने वाले हड्ड्डीओ की बिमारिओ से बचा जा सके l वहीँ गर्भावस्था एवं दूध पिलाने वाली माता का आहार भरपूर पोषक तत्वो से भरा होना चाहिए जिससे माँ तथा बचे दोनों का पोषण सही से हो सके l जब वृद्ध अवस्था में पोषण तत्वो का अलग बैलेंस होना चाहिए l

महिलाओं में पोषण संबंधी दिशा-निर्देशों की कमी?
कई अनुसंधान अध्ययन से भी ये पता चला हैं की महिलाओं में आहार संबंधी कमी हमेशा से देखी जाती हैं। इसके कई कारण हैं – आप अपने परिवार की जरूरतों पर पहले ध्यान देती हैं , अपने दैनिक पोषाहार के जरुरत को हमेशा नेगलेक्ट करना इत्यादि l

एक स्वास्थ्यवर्द्धक आहार क्या है?
एक संतुलित आहार उसे कहते हैं जिसमे विभिन्न खाद्य पदार्थों का समावेश हो, जिससे महिलाओं को पर्याप्त रूप पोषक तत्वो जैसे विटामिन, खनिज और ऊर्जा की जरूरतों को पूरा कर सके l अच्छे स्वास्थ्य के लिए, महिलाओं को कैल्शियम, आयरन और फोलेट (फोलिक एसिड) के सेवन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

स्वस्थ खाने के लिए कुछ सुझाव –
1.खाद्य पदार्थों के विभिन्न किस्मो का सेवन।
2.शरीर के सही वजन को बनाए रखे।
3.संतुलित आहार के साथ शारीरिक गतिविधि पर विशेष ध्यान दे।
4.पूरे अनाज उत्पादों, सब्जियों और फलों को अपने आहार में शामिल करे।
5.आहार में वसा का कम इश्तेमाल तथा सही तेल का चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
6.शर्करा का कम इश्तेमाल।
7.आहार में नमक और सोडियम का सही मात्रा में उपयोग।
8.दैनिक आहार में विटामिन, खनिज और प्रोटीन के आवश्यकताओं के हिसाब से खाद्य पदार्थों चयन।

आयरन युक्त खाद्य पदार्थ-
आयरन महिलाओं में अच्छे स्वास्थ्य और ऊर्जा के स्तर की कुंजी में से एक है। लौह युक्त खाद्य स्रोतों में मांस, चिकन, मछली, हरे और पिले फल-सब्जियां और अनाज शामिल हैं। लेकिन आयरन हमारे शरीर द्वारा तभी अवशोषित होते हैं जब विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों को साथ खाने में खाया जाए । विटामिन सी के मुख्य खाद्य स्रोतों में आवला, निम्बू, नारंगी , संतरा जैसे सिट्रॉस फल इत्यादि है ।

गर्भावस्था में फोलिक एसिड-
प्रश्व उपरांत बच्चों में जन्म दोष के जोखिम को कम करने के लिए गर्भावस्था में पर्याप्त फोलिक एसिड खाने की जरूरत होती है । खट्टे फल, पत्तेदार साग, सेम और मटर स्वाभाविक रूप से फोलेट होते हैं। वहीँ अनाज, चावल और अंकुरित दालों में भी फोलिक एसिड की अच्छी मात्रा होती हैं l

दैनिक कैल्शियम की आवश्यकता-
स्वस्थ हड्डियों और दांतों के लिए, महिलाओं को हर दिन कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करने की जरूरत है। कैल्शियम हड्डियों को मजबूत रहता है और हड्डियों की कमजोरी, हड्डी सम्बंधित अन्य रोगों से भी बचाता हैं । कुछ कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ हैं -कम वसा या वसा रहित दूध, दही और पनीर, मछली, टोफू (यदि कैल्शियम सल्फेट के साथ बनाया) और अनाज इत्यादि है।

दैनिक गतिविधि और कैलोरी का संतुलन-
शरीर की सक्रियता के हिसाब से कैलोरीज का चयन होता हैं, यानि वो महिलाए जो शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय हैं उन्हें अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती हैं तथा जो कम सक्रीय हैं उन्हें कम कैलोरी की जरुरत होती हैं। मामूली रूप से सक्रिय महिलाओं को एक दिन में 1,800 से 2,200 कैलोरी की जरूरत है। व्यायाम महिला के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नियमित रूप से दैनिक गतिविधि वजन नियंत्रण, मांसपेशियों की ताकत और तनाव प्रबंधन के साथ मदद करता है।

स्वस्थ गर्भावस्था के लिए पोषण टिप्स:

ओमेगा -3 फैटी एसिड : ये बच्चे के तंत्रिका और अर्ली दृश्य विकास के लिए साथ ही जन्म के बाद मां के दूध बनाने के लिए आवश्यक हैं। मछली और फिश आयल ओमेगा -3 फैटी एसिड के मुख श्रोत हैं , जबकि समुद्री शैवाल ओमेगा -3 s के शाकाहारी स्रोत है।

उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन: ये बच्चे के विकासशील मस्तिष्क और तंत्रिका विकाश के लिए महत्वपूर्ण है। मछली, मुर्गी, अंडे, डेयरी पदार्थ, सोयाबीन, अंकुरित दल प्रोटीन के मुख्य स्रोत हैं।

कैफीन का कम सेवन : कैफीन के अधिक सेवन से गर्भपात का खतरा बना रहता हैं और आयरन के अवशोषण को भी हस्तक्षेप करता हैं।

थोड़े-थोड़े देर में थोड़ा-थोड़ा खाना : एक बार में ज्यादा कहने से अच्छा होता हैं, थोड़ी- थोड़ी देर में थोड़ा -थोड़ा खाना इससे बूख भी नहीं लगेगी साथ ही मॉर्निंग सिकनेस और सीने में जलन को भी दूर करता हैं l

स्वस्थ स्तनपान के लिए पोषण टिप्स:

अधिक कैलोरी : इस अवस्था में भी माँ को अपनी साधारण कैलोरी से थोड़ा जटाद लेना चाहिए जो दूध की आपूर्ति बनाए रखने के लिए आवस्यक हैं।

प्रोटीन और कैल्शियम: स्तनपान के दौरान भी प्रोटीन और कैल्शियम मांग ज्यादा होती हैं। नर्सिंग महिलाओं में उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन की आवस्यकता नार्मल रेक्विरेमेंट से 20 ग्राम अधिक होती हैं l

विटामिन की खुराक: स्तनपान के दौरान भी महिलाओं को विटामिन तथा खनिज से भरपूर खाद्य पदार्थो का सेवन करना चाहिए l

शराब, कैफीन और निकोटीन से बचाव : गर्भावस्था से अनुसार ही इस अवस्था में में भी शराब और धूम्रपान से बचना चाहिए, और कैफीन का सेवन कम करना चाहिए l

-Rubina Perween (रुबीना परवीन),
Nutritionist & Dietitian (पोषणविद् & आहार विशेषज्ञ)

Patna,Bihar,India.

 

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