फर्स्‍ट एड कैसे करते हैं?

जब हम कोई भी बीमारी, चोट या दुर्घटना के लिए डॉक्‍टर या ऐम्‍बुलेंस आने से पहले जो ट्रीटमेंट दिया जाता है उसे फर्स्‍ट एड कहते हैं। और इस ट्रीटमेंट के दौरान इस्‍तेमाल में आने वाले चीजों के कलेक्शन को फर्स्‍ट एड किट कहा जाता है।

यानी छोटी-मोटी चोट, जलन, अस्‍थमा का अटैक या दुर्घटना जैसी समस्‍याएं बड़ी परेशानी में तब्‍दील ना हो जाए इसलिए डॉक्‍टर आने से पहले फर्स्‍ट एड देना बेहद जरूरी होता है। इसलिए फर्स्‍ट एड के बारे में सभी को जानकारी होनी चाहिए। आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्‍यम से फर्स्‍ट एड के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं ताकी किसी को जरूरत पड़ने पर आप उसकी आसानी से हेल्‍प कर सकें। तो देर किस बात की आइए हमारे साथ आप भी जानें। लेकिन सबसे पहले हम आपको यह बताएंगें कि फर्स्‍ट एड बॉक्‍स (First-Aid Box) में किन चीजों का होना बेहद जरूरी है।

फर्स्‍ट एड बॉक्‍स में इन चीजों को जरूर रखें

बैंड एड

थर्मामीटर

एंटीबायोटिक क्रीम

क्रेप बैंडेज

एंटीसेप्टिक लोशन जैसे सेवलॉन या डिटॉल

जले पर लगाने वाली क्रीम

पेनकिलर

बुखार की दवा

पेट दर्द की दवा

उल्‍टी की दवा

ड्रेसिंग पट्टी

कैंची

हॉट वॉटर बोतल

फर्स्‍ट एड का उद्देश्‍य

आप जानते हैं कि फर्स्‍ट एड के तीन उद्देश्‍य हैं। जीवन संरक्षण, कंडीशन को बिगड़ने से बचाना, बीमारी से मुक्‍त होने में हेल्‍प करना। जी हां फर्स्‍ट एड मुख्‍य उद्देश्‍य मरीज व्‍यक्ति की ज़िन्दगी की सुरक्षा करना है। स्थिति को खराब होने से बचाने के लिए बाहरी और आं‍तरिक स्थिति को कंट्रोल में रखना आवश्‍यक होता है। रोगी को दवा और मरहम पट्टी करके निरोगी और स्‍वस्‍थ बनाना फर्स्‍ट एड का अंतिम उद्देश्‍य है।

फर्स्‍ट एड की जानकारी

अगर किसी को छोटी-मोटी चोट लग जाती है तो उसे फर्स्‍ट एड दिया जाता है, लेकिन बड़ी चोट यानि सड़क हादसा, चाकू लग जाना या बुरी तरह से जल जाने पर उसे बेसिक लाइफ सपोर्ट की जरूरत होती है। इसमें तीन चीजों को प्राथमिकता देते हैं, जिसे हम फर्स्‍ट एड की ए बी सी के नाम से जानते हैं।

ए से एयरवेज- फर्स्‍ट एड का पहला उद्देश्‍य लाइफ की सेफ्टी से संबंधित है। इसमें इस बात का ध्‍यान रखना जरूरी है कि मरीज को नाक या मुंह से ठीक से सांस आ रही हो।

बी से ब्रीदिंग- सांसें चेक करने के बाद यह चेक करना जरूरी है कि मरीज को सांस लेने में कोई तकलीफ ना हो। अगर सांस रूकती हुई लगे तो चेस्‍ट को जोर-जोर से दबाएं।

सी से सर्कुलेशन-इसमें देखा जाता है कि मरीज का ब्‍लड सर्कुलेशन या खून का संचालन चालू है या नहीं। इसके लिए पल्‍स रेट चेक की जाती है।

फर्स्ट ऐड

जल जाने पर फर्स्‍ट एड

जलने पर फर्स्‍ट एड कैसे करना है यह इस बात पर निर्भर करता है कि जला कितना है। छोटे घाव को ठंडा करना जरूरी होता है और उसे ठंडा रखने के लिए घाव को बहते पानी के नीचे 5 मिनट तक रखें। आप जली हुई त्‍वचा को ठंडे पानी में डुबोकर भी रख सकते हैं। घाव को इसलिए ठंडा किया जाता है ताकी त्‍वचा से गर्मी निकाल कर सूजन को कम किया जाता है। घाव पर गलती से भी बर्फ ना लगाएं। उस हिस्से का तापमान गिर सकता है और ब्लड सप्लाई कम होने से नुकसान हो सकता है। अगर ज्‍यादा जल गया है तो  ज्यादा गहरा जख्म है तो हॉस्पिटल ले जाने तक उस पर ठंडा पानी डालते रहें ताकी जख्म गहरा न हो जाए।

पानी में डूबने पर फर्स्‍ट एड

अगर कोई व्‍‍यक्ति पानी में डूब गया है और पानी में डूबने के कारण बेहोश हो गया है और साथ ही साथ उसके पेट में पानी भी भर गया है तो व्‍यक्ति को पेट उल्‍टा लिटा दें ताकी उसके पेट में भरा पानी निकल जाये और फिर उसे शीघ्र मुंह से साँस दें।

अस्थमा का अटैक

अस्‍थमा का अटैक पड़ने पर मरीज की जेब चेक करें और अगर उसकी जेब इनहेलर हो तो तुरंत इनहेलर को उसे प्रयोग कराएं, उसे रिलैक्‍स महसूस करवाने के लिए कपड़े ढीले कर दें। उसके पास भीड़ ना लगाएं और शोर मचाने से बचें। ऐसे समय में इस बात का भी ध्‍यान रखें कि मरीज को लिटाने से बचें बल्कि उसे बिठाएं। अगर मरीज बोल नहीं पा रहा है तो जितनी जल्दी हो सके, उसे पास के अस्पताल में ले जाने की कोशिश करें।

बेहोश होने पर फर्स्‍ट एड

अगर कोई व्यक्ति बेहोश हो जाता तो उसके सिर को नीचे और पैर को ऊपर की ओर रखें। टाइट कपड़ों को ढीला कर दें। चेहरे और गर्दन पर ठंडा व थोड़ा सा भीगा कपड़ा रखें। अधिकांश मामलों में इस स्थिति में रखा गया मरीज कुछ देर बाद होश में आ जाता है। ज्‍यादातर मामलों में ऐसे स्थिति में कुछ देर में होश आ जाता है लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो तुरंत डॉक्‍टर के पास लेकर जाएं।

मिर्गी आने पर फर्स्‍ट एड

मिर्गी आने पर मरीज को आराम से किसी करवट के बल लिटा लें। ऐसा करने से मुंह से निकलने वाला झाग फेफड़ों में नहीं जाता। मिर्गी से जीभ कटने का खतरा भी रहता है, इसलिए पहले से ही मरीज के दांतों के बीच रूमाल को फोल्ड करके रख दें। अक्‍सर मरीज को 4-5 मिनट में होश आ जाता है इसलिए घबराएं नहीं। देखा जाता है कि ऐसी स्थिति में मरीज को जूता सुंघाते है लेकिन ऐसा करने से बचें।

जानवर के काटने पर फर्स्‍ट एड

अगर किसी को कुत्ता या कोई और जानवर काट लेता है तो सबसे पहले उस हिस्‍से को पानी से धोएं और फिर साबुन लगाकर धोएं। भूलकर भी उस हिस्‍से पर पट्टी ना बांधें। अगर त्‍वचा पर खरोंच या दांतों के निशान दिखाई दे रहे हैं तो 24 घंटे के भीतर एंटी-रैबीज इंजेक्‍शन लगवाना जरूरी है क्‍योंकि ऐसा ना करने से सालों बाद भी रैबीज का वायरस एक्टिव हो सकता है। इंजेक्‍शन लगवाने के लिए आप अपने डॉक्‍टर से संपर्क कर सकते हैं।

इस तरह फर्स्‍ट एड लेकर आप उस स्थिति को ज्‍यादा गंभीर होने से रोक सकते हैं।

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