हिंदु धर्म में गाय को इन कारणों से माना जाता है मां

हिंदु धर्म एक ऐसा धर्म है जहां मां को देवी का दर्जा दिया जाता है और क्‍योंकि गाय हमें पीने योग्‍य दूध, खाने योग्‍य दूध से बनी चीजें और घर में चूल्‍हा जलाने के लिए गोबर देती है इसलिए उसे मां के रूप में देखा जाता है। जी हां हमारे यहां गाय को पूजनीय माना जाता है और पृथ्‍वी के लिए दैवीय इनाम का प्रतीक माना जाता है। और अगर हम गांवों की बात करें तो गाय उनके लिए भगवान का वरदान है।

गाय हमारी माता है यह पाठ शायद मेरी तरह आपने भी बचपन में पढा होगा लेकिन इसकी सच्‍चाई जानने की कोशिश नहीं की। गायों के बिना हमारी खेती ही नहीं बल्कि पृथ्‍वी पर जीवन की कल्‍पना भी नहीं की जा सकती हैं। यह बात भगवान कृष्‍ण को भी समझ में आ गई थी।

जी हां भगवान कृष्ण, जो सबसे प्रसिद्ध हिंदू देवताओं में से एक हैं,  वह गायों के बीच अपनी बांसुरी बाजते और गोपियों के साथ नृत्य करते दिख जाते थे। वह गाय के चरवाहे  के रूप में बड़े हुए थे। कृष्ण को गोविंदा और गोपाल नाम से भी जाना जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ “गायों के दोस्त और रक्षक” होता है। वह गायों  के एक सच्चे भक्त थे और गायों को खिलाना बेहद शुभ माना जाता है।

गाय को सुरक्षित किया जाना चाहिए

पूरे वैदिक ग्रंथों में कई छंद हैं जो इस बात पर जोर देते हैं कि गाय को सुरक्षित और देखभाल की जानी चाहिए। जहां एक गाय को मारने और इसके मांस को खाना पाप माना जाता है। आज भी भारत में, ऐसे कई राज्य हैं जहां गायों का वध अवैध है यही कारण है कि आप दिल्ली और मुंबई की व्यस्त सड़कों के साथ-साथ भारत भर में स्वतंत्र रूप से घूमते गायों को पा सकते हैं।

cow sewa

आयुर्वेद में गाय के उत्‍पादों का महत्‍व

आयुर्वेद में तो दूध और डेयरी उत्पादों के गुणों का बहुत महत्‍व होता है। यही कारण है कि अधिकांश हिंदू शाकाहारी हैं। ताजा, जैविक दूध, दही, छाछ, पनीर (घर का बना पनीर) और घी, सभी को अत्यंत पौष्टिक माना जाता है, और आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ना केवल यह डेयरी उत्पादों हमारे ऊतकों के लिए महत्वपूर्ण प्रोटीन और कैल्शियम प्रदान करते हैं, बल्कि ऊर्जा के स्रोत हैं, जो हमारे शरीर को ताकत और इम्‍यूनिटी प्रदान करता है।

दूध के अलावा, गायों को कई व्यावहारिक उद्देश्य के लिए भी इस्‍तेमाल किया जाता हैं, और ग्रामीण समुदाय के लिए एक वास्तविक आशीर्वाद माना जाता है। खेत में, खेतों को हल करने के लिए बैल का उपयोग किया जाता है और माल के परिवहन के साधन के रूप में। यहां तक ​​कि भगवान शिव का विश्वसनीय वाहन नंदी-पवित्र बैल है।

भारत जैसे आध्यात्मिक भूमि में, किसी भी समय और किसी भी जगह धार्मिक समारोह हो सकते हैं। आध्यात्मिक “यज्ञ” आग समारोह है जिसका प्रदर्शन भगवान को शु्क्रिया करने और आर्शीवाद प्राप्‍त करने के लिए किया जाता है। इन अग्नि यज्ञ या अग्निहोत्री में गाय एक केंद्रीय भूमिका निभाती हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान ने पाया है कि इन पवित्र अनुष्‍ठान को जलाने के लिए गोबर और पवित्र अग्नि के लिए घी की जरूरत होती है जो वास्तव में हवा को शुद्ध करता है, और पर्यावरण में प्रदूषणकारी और विकिरण गुणों को रोकता है।

पवित्र अमृत के फायदे

पवित्र अमृत

आयुर्वेद समझता है कि शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य संकट में हैं और सिर्फ आहार और जड़ी-बूटियों से ठीक नहीं हो सकता हैं। इसलिए ज्योतिषीय कर्मों को स्पष्ट करने के लिए इस प्रकार के वैदिक अनुष्ठान समारोहों की गहरी और सूक्ष्म चिकित्सा की आवश्यकता होती हैं।

इन समारोह के बाद बांटा जाने वाला यह धन्य पेय यानी पंचमृत “पवित्र अमृत” या “देवताओं का अमृत” के रूप में जाना जाता है और इसमें 5 वस्तुएं – दूध, दही, घी, शहद और चीनी मौजूद होती है। इस मीठे प्रसाद को पीने से, पूजा के दौरान बनाई गई दिव्य एनर्जी आप में आ जाती है,और आपको अच्‍छा महसूस होता है।

गौमूत्र के फायदे

इन सबसे यह बात स्‍पष्‍ट होती है कि हिंदू धर्म में ऐसे ही गाय को मां का दर्जा  नहीं दिया गया। बल्कि इसका दूध, घी, मूत्र, गोबर  आदि सभी बहुत ही फायदेमंद है। जी हां आयुर्वेद में तो गौमूत्र से कई तरह की दवाइयां बनाई जाती है। जिस गौमूत्र का नाम सुनकर आप अपनी नाक सिकोड़ लेते है वह वाक्‍य में कई बड़े रोगों का रामबाण इलाज है। इसमें नाइट्रोजन, फॉस्‍फेट, यूरिक एसिड, पोटैशियम, क्‍लोराइड, कॉपर और सोडियम पाया जाता है। गौमूत्र से लगभग 108 रोगों को ठीक किया जा सकता है। यह भी माना जाता है कि गाय के मूत्र में करकुर्मीन नामक तत्‍व होता है जो कैंसर सेल्‍स को पनपने से रोकता है।

गाय का गोबर के फायदे

गाय का गोबर बचाकर ईंधन के लिए उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह मीथेन से भरपूर होता है और हीट और बिजली पैदा कर सकता है। कई गांव के घरों में मिट्टी / गाय के गोबर के मिश्रण से पोता जाता है, जो दीवारों और फर्श को अत्यधिक गर्म और ठंडे तापमान से बचाता है। गोबर भी मिनरलों से भरपूर है, जो उसे एक उत्कृष्ट उर्वरक बनाता है। भारत में कई एक बड़े जैविक खेती आंदोलन है जहां गाय के गोबर का उपयोग प्राचीन तरीके का इस्‍तेमाल करके क्षीण हुई मिट्टी को फिर से उर्वरक बनाया जाता है।

गाय के घी के फायदे

गाय के घी

घी का नाम सुनते ही हमें अपने मोटे होने का डर सताने लगता है। लेकिन आपको इस बात को सुनकर आश्‍चर्य होगा कि गाय का घी अमृत के समान होता है जिसे खाने से वजन नहीं बढ़ता बल्कि आपकी हेल्‍थ अच्‍छी रहती है। गाय का घी नाक में डालने से माइग्रेन की समस्‍या दूर होती है। गाय का घी एंटी-ऑक्‍सीडेंट से भरपूर होने के कारण फ्री रेडिकल्‍स से लड़ता है जिससे आपके चेहरे पर चमक आती है और यह आपकी त्‍वचा को सॉफ्ट बनता है। साथ गाय के घी में विटामिन-के पाया जाता है जो ब्‍लड में जमा कैल्शियम को हटाता है जिससे ब्‍लड सर्कुलेशन सही रहता है। और आपकी इम्‍यूनिटी मजबूत होती है और इंफेक्‍शन से होने वाली बी‍मारियों से लड़ने में हेल्‍प करता है।

गाय का दूध

cow milk

जैसे कि हम पहले ही बता चुके हैं कि गाय का दूध पृथ्‍वी का सबसे अच्‍छा आहार है। क्‍योंकि आपको मजबूती देने वाला कोई और ऐसा अच्‍छा पदार्थ पृथ्‍वी में हैं ही नहीं। जी हां सोने जैसे गुणों और दिखने वाला गाय का दूध ही केवल ऐसा है जिसमें विटामिन ए भी पाया जाता है किसी भी दूसरे पशु दूध में विटामिन ए नहीं होता है। हमने इसे सोने जैसा इसलिए कहा है क्‍योंकि गाय का घी थोड़ा सा पीला होता है। गाय के दूध में प्रोटीन, 6 तरह के विटामिन, एमिनो एसिड, मिनरल तत्‍व, फास्‍फोरस, नाइट्रोजन, कैल्शियम, आयोडीन, कॉपर और आयरन आदि तत्‍व पाये जाते हैं। जो आपके समुचित विकास के लिए बहुत जरूरी होता है।

एक खास बात और जो हम आपको बताना चाहते हैं वह यह कि गायों में एक अद्भुत क्षमता होती है। अगर गाय कोई जहरीली चीज खा लेती है तो उसका असर उसके दूध में नहीं आता क्‍योंकि गाय के शरीर में नॉर्मल जहर को पचाने की अद्भुत क्षमता होती है। जी हां यह जहर देसी गाय के गले के नीचे लटकने वाले मांस में ही रह जाता है। इसलिए यह दूध में नहीं जाता है।

अब तो आपको समझ में आ ही गया होगा कि हिंदु धर्म में क्‍यों गाय को मां का दर्जा दिया जाता है। तो देर किस बात की अगर आप भी हेल्‍दी और लंबी लाइफ जीना चाहते हैं तो आज से ही गाय से मिलने वाले इन उत्‍पादों को इस्‍तेमाल करना शुरू कर दें।

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